समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े सभी जिलाधिकारियों और प्रभागीय वनाधिकारियों से बात की। उन्होंने फायर सीजन में उपकरणों की पूर्ण व्यवस्था का निर्देश दिया और कहा कि एसडीआरएफ मद से भी उपकरण लिए जा सकते हैं। वनाग्नि को रोकने के लिए पिरूल एकत्रीकरण की व्यवस्था करने, मुआवजा समय से लोगों को देने और वन विभाग के वाहनों का अधिग्रहण न करने का निर्देश भी दिया।
आग बुझाने में काम आने वालीं मोटरसाइकिलें रवाना
15 फरवरी से शुरू हो रहे फायर सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कैंपा मद से प्राप्त बाइकों को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने स्टेट फायर प्लान की प्रति का अनावरण भी किया।
दो मिनट का मौन रख कर दी श्रद्धांजलि
गढ़वाल वन प्रभाग पौड़ी के वनकर्मी हरिमोहन सिंह एवं फॉरेस्टर दिनेश लाल को वनाग्नि बुझाते समय कार्यों के निर्वहन के दौरान अपनी जान गंवानी पड़ी थी। बैठक शुरू होने से पूर्व इन दोनों कार्मिको के निधन पर दो मिनट का मौन रखा गया।
वन मंत्री हरक सिंह के मुताबिक कई वन पंचायतों ने वन प्रबंधन में आदर्श प्रस्तुत किया है। आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए वनाग्नि प्रबंध में बेहतर काम करने वाली वन पंचायतों को सम्मानित करने का भी फैसला किया गया है।
पहले स्थान पर रहने वाली वन पंचायत को पांच लाख और दूसरे स्थान पर रहने वाली वन पंचायत को तीन लाख रुपये दिए जाएंगे। वन विभाग के अधिकारियों को इस योजना का खाका बनाने को कह दिया गया है।
1931 में बनाया गया था वन पंचायत कानून
जंगल पर अधिकार के संघर्ष के कारण उपजी वन पंचायतों को लेकर ब्रिटिश राज में 1931 में वन पंचायत कानून बनाया गया था। राज्य गठन के बाद 2001 में वन पंचायत कानून बनाया गया और 2012 में इसमें संशोधन किया गया। प्रदेश में करीब 15 हजार वन पंचायतों के अधीन 5.23 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र है।
वन पंचायतों के चुनाव न होने से वन मंत्री नाराज
चुनाव न होने से अधिकतर वन पंचायतों में प्रबंध समितियों का गठन नहीं हुआ है। इस पर वन मंत्री हरक सिंह ने नाराजगी भी जताई है। वन मंत्री ने वन पंचायतों के चुनाव जल्द से जल्द कराने का निर्देश भी प्रभागीय वन अधिकारियों को दिए हैं।