फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चमोली आपदा : नदियों की भूआकृति और मलबे की मात्रा का होगा अध्ययन, जुटे वैज्ञानिक

Fri, 12 Feb 2021 03:05 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
चमोली में आपदा के बाद का नजारा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

चमोली जिले की नीती घाटी में आई प्राकृतिक आपदा ने जहां कई इंसानी जिंदगियां छीन ली हैं और करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ। वहीं आपदा से ऋषिगंगा और धौलीगंगा जैसी नदियों की भूआकृति में भी बदलाव हो गया है। इसका अध्ययन वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी की ओर से किया जाएगा। 

विज्ञापन


चमोली आपदा : ग्लेशियरों की सेहत खराब कर रहा ब्लैक कार्बन, बढ़ रही पिघलने की रफ्तार

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके राय के अनुसार आपदा के बाद कई हजार मीटर की ऊंचाई से आए हजारों टन वजनी चट्टानों और लाखों टन बर्फ के मलबेे ने ना सिर्फ दोनों नदियों में भारी कटाव किया है, वरन रैणी समेत कई गांवों के खेतों को ही नेस्तनाबूद कर दिया है।
विज्ञापन


प्राकृतिक आपदा के चलते दोनों नदियों के किनारों पर जबरदस्त कटाव होने के साथ ही कई स्थानों पर नदी की धारा में भी बदलाव हुआ है। आपदा के बाद संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम आपदा के कारणों का अध्ययन करने के साथ ही आपदा के बाद धौलीगंगा, ऋषिगंगा जैसी नदियों की भूआकृति में हुए बदलाव के साथ ही नदियों के किनारे बसे गांवों में हुए नुकसान का भी अध्ययन कर रहे हैं। वैज्ञानिकों की टीमें इस बात का भी पता लगा रही हैं कि कितना मलबा धौलीगंगा, ऋषिगंगा जैसी नदियों में आया।

विज्ञापन

चार शवों और सात मानव अंगों का कर्णप्रयाग में हुआ दाह संस्कार 

वहीं गुरुवार को कर्णप्रयाग में पोखरी पुल घाट पर रैणी आपदा में बहे चार शवों और सात मानव अंगों का गमगीन माहौल में सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान अलग-अलग चिताएं बनाकर उनको मुखाग्नि दी गई।

वहीं, आपदा में बहे लोगों के शव मिलने का सिलसिला जारी है। अलकनंदा नदी किनारे खोजबीन के दौरान एक शव गलनाऊं के पास अलकनंदा नदी किनारे मिला है। जिसे पुलिस ने मोर्चरी में शिनाख्त के लिए सुरक्षित रख दिया है। 

तहसीलदार सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि सात फरवरी को आपदा आने के बाद अलकनंदा नदी किनारे खोजबीन के दौरान अलग-अलग स्थानों पर कुल पांच शव मिले थे। जिनमें से एक शव की शिनाख्त हो गई थी। बाकी चार शवों और सात मानव अंगों की शिनाख्त नहीं हो पाई।

उनके डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने के बाद गुरुवार को धार्मिक रीति रिवाज से पुलिस/प्रशासन और नगरपालिका की ओर से कर्णप्रयाग घाट पर अलकनंदा नदी किनारे अंतिम संस्कार कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नदी किनारे सर्च अभियान जारी है।

पुलिस, एसडीआरएफ व एसएसबी के जवान लगातार नदी किनारे रेस्क्यू अभियान में जुटे हैं। पूरी अलकनंदा नदी में जवान दिनभर आपदा में बहे लोगों की खोजबीन कर रहे हैं। तहसीलदार ने कहा कि जिलासू के आसपास एक अन्य शव मिलने की सूचना पर प्रशासन की टीम वहां के लिए रवाना हो गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें