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उत्तराखंड: वरदान से कम नहीं देवभूमि में जिम्मेदारी मिलना - नए राज्यपाल गुरमीत सिंह

Sun, 12 Sep 2021 10:18 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

Uttarakhand New Governor: राज्य के आठवें और सैन्य पृष्ठभूमि वाले पहले राज्यपाल गुरमीत सिंह उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से बाखूबी वाकिफ हैं। उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया। सेना में सेवा के दौरान वह चंपावत के बनबसा में तैनात रहे।
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लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उत्तराखंड के राज्यपाल बनाए गए लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह का मानना है कि देवभूमि तभी बुलाती है जब आपके सिर पर ईश्वर का आशीर्वाद हो और सृष्टि का वरदान हो। यह सौभाग्य है कि उन्हें सैनिकों, संतों और विद्वानों की भूमि पर सेवा करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। 

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राज्य के आठवें और सैन्य पृष्ठभूमि वाले पहले राज्यपाल गुरमीत सिंह उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से बाखूबी वाकिफ हैं। उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया। सेना में सेवा के दौरान वह चंपावत के बनबसा में तैनात रहे। वह कहते हैं, 1996 से 1999 तक में मैं बनबसा में रहा। यानी राज्य के पर्वतीय परिवेश की भी उन्हें जानकारी है।

उत्तराखंड सैनिकों, संतों और विद्वानों की भूमि है
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह का उत्तराखंड के प्रति बहुत सम्मान है। वह कहते हैं गुरू गोविंद सिंह जी का स्वरूप सैनिक, संत और विद्वान का था। उत्तराखंड सैनिकों, संतों और विद्वानों की भूमि है। यहां सैनिक भी हैं, संत भी हैं और विद्वान भी हैं। ऐसी सैन्य और देवभूमि में सेवा का अवसर मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। 
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शपथ लेने के बाद साझा करूंगा प्राथमिकताएं  
अपनी प्राथमिकताओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि इन्हें वह शपथ लेने के बाद ही साझा करेंगे।

राज्य का सैनिक वर्ग उत्साहित
जानकारों की मानें तो सामरिक मामलों के गहरी समझ रखने वाले राज्यपाल के आने से सीमांत इलाकों में तैनात सैनिकों और अर्द्धसैनिक बलों का भी मनोबल बढ़ेगा। साथ ही सीमांत इलाकों में सामरिक तैयारियों को लेकर राज्य सरकार भी उनके अनुभवों का लाभ और मार्गदर्शन मिलेगा।
 

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सेना से जुड़े पूर्व सैनिक भी हैं उत्साहित

सैन्य अधिकारी को राजभवन की कमान सौंपे जाने से सेना से जुड़े लोगों में उत्साह है। उनका मानना है कि सेना के अधिकारी को राज्यपाल बनाए जाने से पूर्व सैनिकों का सम्मान बढ़ा है।

सैनिक अधिकारी को राज्यपाल बनाए जाने से प्रदेश के सैनिकों में खुशी है। पहली बार सेना के अधिकारी को राज्यपाल बनाया गया है। 
- कर्नल एनसी पंत (सेवानिवृत्त) 

सेना के अफसर को राज्यपाल बनाए जाने से सैनिकों का सम्मान बढ़ा है। सेना के अफसर होने के नाते वह सैनिकों की समस्याओं को भली भांति समझेंगे।
-कर्नल एसएस चौधरी (सेवानिवृत्त) 

अभिभावक की तरह मिला राज्यपाल बेबी रानी मौर्य का मार्गदर्शन : सीएम
वहीं देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हॉल में शनिवार को राज्यपाल बेबी रानी मौर्य के सम्मान में विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें पौधा भेंट करने के साथ ही शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।  

राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने  कहा कि प्रदेश की जनता ने उन्हें जो सम्मान दिया है,उसके लिए आभारी हैं। उत्तराखंड को वे कभी नहीं भूल सकती हैं। राज्यपाल ने कहा कि यहां के फलों, जड़ी बूटी व अन्य परंपरागत उत्पादों की प्रदर्शनी देश के विभिन्न भागों में आयोजित की जानी चाहिए। इससे राज्य को पहचान मिलेगी। उन्होंने राज्य की महिलाओं के कल्याण के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत बताई। राज्यपाल ने कहा कि वे गंगोत्री व यमुनोत्री के दर्शन करने के लिए यहां आएंगी। 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने एक अभिभावक की तरह उनका मार्ग दर्शन किया। उन्होंने मुझे मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई है। इसका भी स्मरण उन्हें जीवन भर रहेगा। छोटे भाई की तरह उनका स्नेह भी उन्हें प्राप्त होता रहा है। उनके सभी से आत्मीय संबंध रहे। प्रदेश की जनता में वे काफी लोकप्रिय रहीं।
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