मदद कर रही कुछ स्वयं सेवी संस्थाएं
बंदियों को पढ़ने में कुछ स्वयं सेवी संस्थाएं भी मदद कर रही हैं। जो समय समय पर किताबें, पेंसिल, कॉपी आदि उपलब्ध करा देती हैं। बंदियों के अध्ययन के लिए बाकायदा एक पुस्तकालय भी तैयार है, जहां धार्मिक किताबों के अलावा विज्ञान, समाचार पत्र और पत्रिकाएं भी रखी गई हैं।
एक प्रधानाचार्य और बाकी शिक्षक
पढ़ाने वाले शिक्षक स्नातक तक पढ़े हैं। प्रधानाचार्य हैं शंकर तो गणित राजेंद्र सिंह पढ़ाते हैं। इसके अलावा मनीष अंग्रेजी, अनुपम बंगला, जगतार पंजाबी और नावेद उर्दू सिखा रहे हैं। इसके अलावा बंदियों को इमला लिखवाई जाती है और सामान्य ज्ञान भी पढ़ाया जाता है।
प्रयास है कि जो निरक्षर हैं, वे साक्षर हो जाएं। कई बंदी लिखना और पढ़ना भी सीख गए हैं। राज्य में एकमात्र इसी जेल में बंदियों के लिए यह अभिनव प्रयोग शुरू किया है। अभी 90 बंदी पढ़ाई कर रहे हैं।
- मनोज कुमार आर्या, वरिष्ठ जेल अधीक्षक