जूली 17 महीने की हुई तो उमा और दर्शनलाल को चिंता सताने लगी कि कोई उसे नुकसान न पहुंचा दे। उन्होंने लोगों से राय मशविरा किया तो तय हुआ कि जूली को अब उसकी दुनिया में भेज देना ही उचित है। यह फैसला करना दोनों के लिए बहुत कठिन था, लेकिन उन्होंने जूली की भलाई में अपनी भावनाओं को आड़े नहीं आने दिया।
उमा और दर्शनलाल को पता था कि जूली अब जंगल में नहीं रह पाएगी। इसीलिए दोनों बद्रीनाथ वन विभाग के रेंज कार्यालय नारायणबगड़ पहुंचे और जूली के लिए सुरक्षित आसरा मांगा। बद्रीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ आशुतोष सिंह ने बताया कि देहरादून जू यानी मालसी डियर पार्क में जूली को रखने की अनुमति मिल गई है।
डीएफओ ने बताया कि जूली को विभाग के विशेष वाहन से शनिवार को रेंजर भगवान सिंह परमार व वन दरोगा बलबीर लाल सोनी की देखरेख में देहरादून भेजा गया। संवाद
जूली की परवरिश अपने बच्चे की तरह करने के लिए उमा और दर्शनलाल काफी चर्चा में हैं। लोगों ने उनके इस कार्य की सराहना की है। क्षेत्र के दलीप सिंह नेगी, बीरेंद्र सिंह नेगी, देवेंद्र पाल सिंह परिहार, दरवान सिंह गुसाईं, डॉ भूपेंद्र सिंह मेहरा, जयपाल सिंह बुटोला, पूर्व कनिष्ठ उप प्रमुख मनवीर सिंह रावत आदि ने वन विभाग से दंपती को पुरस्कृत करने की मांग की।