इन दस्तावेजों के लिए एक म्यूजियम बनाने के लिए कई बार शासन प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने हाथ आगे नहीं बढ़या। पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी, डॉ. केके पाल सहित कई मंत्रियों, अधिकारियों को पत्र लिखे, लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। लिहाजा महत्वपूर्ण दस्तावेज रखरखाव के अभाव में नष्ट हो रहे हैं। एलबीएस अकादमी सहित हर सरकारी कार्यक्रमों में इन फोटोग्राफ की प्रदर्शनी लगाई जाती है। नेता-अधिकारी आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता मनीष गौनियाल कहते है कि दस्तावेजों को संरक्षित करने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए। इतिहासकार गोपाल भारद्वाज के पास करीब पांच सौ से अधिक दुर्लभ फोटोग्राफ और लिथोग्राफ के साथ दो सौ साल पुराने दस्तावेज हैं। इतिहासकार गोपाल भारद्वाज म्यूजियम बनाने के लिए दो दशक से संघर्ष कर रहे हैं।
वहीं नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने कहा कि मसूरी के इतिहास से जुड़े दस्तावेज के लिए बहुत जल्द झूलाघर में करीब एक करोड़ की लागत से म्यूजियम बनाया जाएगा। म्यूजियम के लिए प्रस्ताव भी पास कर दिया गया है। बहुत जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू होने वाली है।