शिवालिक एलिफेंट रिजर्व को खत्म करने के सरकार के फैसले का विरोध बढ़ता जा रहा है। इस फैसले के विरोध में जारी अभियान में अब तक 12 हजार लोग जुड़ चुके हैं।
उत्तराखंड वन्यजीव बोर्ड की 24 नवंबर की बैठक में शिवालिक एलिफेंट रिजर्व की अधिसूचना को निरस्त करने का फैसला किया गया था। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला हुुआ था। तभी से इसका विरोध शुरू हो गया था और अब यह और तेज हो गया है।
ट्वीटर के साथ ही चेंज.ओआरजी वेबसाइट पर यह विरोध खुलकर सामने आ रहा है। वेबसाइट पर हस्ताक्षर अभियान भी जारी है और इसमें करीब 12 हजार हस्ताक्षर हो चुके हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है।
इस अभियान के साथ जौलीग्रांट एयरपोर्ट का मसला भी जुड़ रहा है और यह सरकार को और परेशान कर सकता है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तार को सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां थानो वन को बचाओ मुहिम जोर पकड़ रही है।
क्या है मसला
शिवालिक एलिफेंट रिजर्व उत्तराखंड में हाथियों का एकमात्र अभ्यारण्य है। उत्तराखंड का ये क्षेत्र करीब पांच हजार वर्ग किलोमीटर का है, जहां एशियाई हाथियों की मौजूदगी है। 28 अक्तूबर 2002 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अधिसूचना जारी कर इसे एलिफेंट रिजर्व घोषित किया था। प्रदेश के 17 वन प्रभागों में से 14 प्रभाग इस रिजर्व में शामिल हैं। प्रदेश सरकार के मुताबिक इस शिवालिक रिजर्व की अधिसूचना निरस्त करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। अधिकतर क्षेत्र अब भी संरक्षित वन क्षेत्र का हिस्सा है।
थानों वन बचाने की मुहिम
यह मान लिया गया है कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तार के लिए शिवालिक एलिफेंट रिजर्व को कुर्बान किया जा रहा है। हालांकि, वन विभाग के अधिकारी इससे इंकार कर रहे हैं। एयरपोर्ट के विस्तार के लिए थानों वन क्षेत्र के करीब दस हजार पेड़ काटने की बात हो रही है और इसके विरोध में पर्यावरणविद सक्रिय हैं। ऐसे में शिवालिक रिजर्व की मुहिम थानो वन को बचाने की मुहिम का हिस्सा भी बन रही है।
बोर्ड के स्तर पर फैसला हो चुका है। अब सरकार के स्तर पर इसका आदेश जारी किया जाना है। यह अभी प्रक्रिया में है। जल्द ही इस पर फैसला होने की उम्मीद है।
-हरक सिंह रावत, वन मंत्री उत्तराखंड