प्राचीन कुंड किए जाएंगे संरक्षित
त्रियुगीनारायण मंदिर में सात कुंड हैं, जिसमें ब्रह्मकुंड, रुद्रकुंड, विष्णुकुंड, सूरज कुंड, सरस्वती कुंड, नारद कुंड और अमृत कुंड है। इन सभी को भी संरक्षित किया जाएगा। खास बात है कि ब्रह्मकुंड, विष्णुकुंड और रुद्रकुंड में जल सरस्वती कुंड से आता है। मान्यता है कि सरस्वती कुंड की स्थापना भगवान विष्णु ने अपनी नाभी से की थी। इस कुंड में स्नान करने से संतान प्राप्ति होती है।
त्रियुगीनारायण मंदिर के संरक्षण और संवर्द्धन को लेकर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। मंदिर की छतरी व झालर के पुनरोद्धार के साथ ही यहां अन्य कई कार्य किए जाने हैं। इसके लिए पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों का सहयोग लिया जाएगा। चरणबद्ध तरीके से अधीनस्थ अन्य मंदिरों का भी सौंदर्यीकरण कर उन्हें संरक्षित किया जाएगा।
- अजेंद्र अजय, अध्यक्ष श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति