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पेड़ बयां करेंगे गलवां के शहीदों की गौरव गाथा, वन अनुसंधान ने स्थापित की ‘गलवां वाटिका’ 

Sat, 22 Aug 2020 01:06 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अरविंद सिंह , अमर उजाला, देहरादून
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पौधे - फोटो : Social media
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भारत-चीन सीमा पर स्थित गलवां घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच 15 जून को हुई हिंसक झड़प में सेना के कर्नल संतोष बाबू समेत शहीद हुए 20 जांबाजों की गौरव गाथा जहां पूरे देश में गायी जा रही है, वहीं उत्तराखंड वन अनुसंधान शाखा ने भी अनूठे अंदाज में अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी है।

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अनुसंधान शाखा की ओर से हल्द्वानी स्थित बायोडायवर्सिटी पार्क में ‘गलवां वाटिका’ स्थापित की गई है। जिसमें शहीदों की याद में पीपल, बरगद, जामुन, आम समेत कई प्रजातियों के पेड़ लगाए गए हैं।

वन अनुसंधान शाखा के वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञानियों और कर्मचारियों ने शहीदों को नमन करते हुए एक-एक शहीद के नाम पर एक प्रजाति का पेड़ लगाया है। गलवां वाटिका में पीपल, बरगद, आम, जामुन, मौलश्री, अमलतास, तेजपात और बेडू के पौधे लगाए गए हैं। 

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श्रीराम के हाथों ड्रेगन का वध दर्शाती तस्वीर बनी आकर्षण का केंद्र

बायोडायवर्सिटी पार्क में एक अद्भुत तस्वीर लगाई गई है। जिसमें मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के हाथों ड्रेगन का वध करते हुए दर्शाया गया है। तस्वीर में श्रीराम ड्रेगन को बाण मारकर उसका संहार करते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीर दर्शकों के लिए आकर्षण का विशेष केंद्र बनी हुई है। 

शहीदों की याद में स्थापित की गई थी पुलवामा वाटिका

यह पहली बार नहीं है जब अनुसंधान शाखा की ओर देश के अमर शहीदों को अनूठे अंदाज में श्रद्धांजलि दी गई है। इससे पूर्व जब पुलवामा में आतंकी हमला हुआ था, तब भी वन अनुसंधान शाखा की ओर से शहीद हुए 40 शहीदों की याद में पुलवामा वाटिका लगाई गई थी। 

देश की रक्षा में जान की बाजी लगाने वाले अमर शहीदों की याद में गलवां वाटिका स्थापित की गई है। धार्मिक महत्व के वृक्षों के जरिये जहां अमर शहीदों को नमन किया गया है। बायोडायवर्सिटी पार्क आने वाली कई पीढ़ियों को गलवां वाटिका जवानों की जांबाजी के किस्से बयां करेगी। यही अमर शहीदों को वन अनुसंधान शाखा की ओर से सच्ची श्रद्धांजलि है। 
- संजीव चतुर्वेदी, मुख्य वन संरक्षक एवं निदेशक, वन अनुसंधान शाखा
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