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एक्सक्लूसिव : दुर्गम इलाकों में ट्रैकर को मिलेगी मोबाइल कनेक्टिविटी, जीपीएस से लोकेशन रीडिंग शुरू

Sat, 12 Dec 2020 09:52 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal निशांत खनी, अमर उजाला, हरिद्वार
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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उत्तरकाशी जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है। पंडित गोविंद बल्लभ पंत वन्य जीव एवं राष्ट्रीय पार्क प्रशासन ने क्षेत्र को संचार कनेक्टिविटी से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। पहले चरण में सांकरी में रिपीटर लगाकर इलाके को वायरलेस जोन बना दिया है।

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दूसरे चरण में जीपीएस की मदद से मोबाइल टावर लगाने के लिए लोकेशन रीडिंग शुरू हो गई है। इससे जल्द ही ट्रैकिंग के लिए पहुंचने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों को मोबाइल नेटवर्क मिल सकेगा। पार्क के सीमावर्ती 42 गांवों के लोगों को इसका सबसे अधिक फायदा मिलेगा।

पार्क की रुपिन, सुपिन और सांकरी रेंज के बुग्याल और उच्च हिमालयी इलाके पर्यटकों को खूब लुभाते हैं। बेहद खूबसूरत और बर्फ की सफेद चादर से ढके रहने वाले इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं है। पर्यटक कई बार रास्ता भटक जाते हैं। वन विभाग की टीमें भी कई दिन तक संपर्क नहीं कर पाती हैं।

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बीते वर्ष पहुंचे 14044 देशी और 174 विदेशी पर्यटक

पार्क के उप निदेशक कोमल सिंह ने बताया कि पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्क को संचार कनेक्टिविटी से जोड़ा जा रहा है। पहले चरण में पार्क कर्मचारियों के लिए 10 नए वायरलेस सेट खरीदे गए हैं। सांकरी में वायरलेस रिपीटर लगा दिया है। इससे क्षेत्र वायरलेस जोन बन गया है। वायरलेस की तरंग कमजोर होने पर रिपीटर दूसरे स्टेशन को तरंग भेजकर कनेक्टिविटी करेगा। कर्मचारी आपस में जुड़े रहेंगे और पर्यटकों की खोज खबर भी नियमित देते रहेंगे। 
कोमल सिंह ने बताया कि सिर्फ उनके पास सेटेलाइट फोन है। रूपिन, सुपिन और सांकरी में ट्रैकिंग के लिए पहुंचने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए तीनों रेंज और पार्क के आसपास मोबाइल कनेक्टिविटी  के लिए टॉवर लगाने की शुरुआत की जा रही है। रिलायंस कंपनी से वार्ता हो चुकी है और कंपनी ने जीपीएस की मदद से टॉवर के लिए लोकेशन चिह्नित करना भी शुरू कर दिया है। 

हर साल हजारों देशी और विदेशी पर्यटक ट्रैकिंग के लिए पहुंचते हैं। बीते साल 14044 देशी और 174 विदेशी पर्यटकों के ट्रैकिंग के लिए पहुंचने से पार्क प्रशासन को 48 लाख रुपये का राजस्व मिला। हालांकि, इस साल कोविड-19 के चलते पर्यटक कम हैं। पार्क दिसंबर में बंद हो जाता है और मार्च के बाद खुलता है।
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