नौ अप्रैल को पति अपने चालक, दो सिपाहियों, चपरासी के साथ रिंकी को पिता के घर लेकर आया और जबरन तलाकनामे पर दस्तखत कराने की कोशिश की थी। आरोप है कि पति ने लाइसेंसी रिवाल्वर निकालकर धमकाने के साथ जबरन गाड़ी में खींचकर ले जाने की कोशिश की थी।
शोर सुनकर भाई और भाभी ने वहां पहुंचकर उसे बचाया था। पति पद का दुरुपयोग कर उसका दहेज के लिए उत्पीड़न करता है और क्रूरतापूर्वक व्यवहार करता है। पिछले साल भी उसके साथ मारपीट की गई थी। इसके बाद 19 नवंबर 2019 को उसने बलरामपुर के जिला अस्पताल में मेडिकल कराया था।
रिंकी का कहना है कि जानमाल का खतरा बना हुआ है। कोतवाल एनएन पंत ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर सात आरोपियों पर धारा 498 ए, 323, 504,506 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा तीन और चार के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच बाजार चौकी इंचार्ज प्रदीप पंत को सौंपी गई है।
हेल्पलाइन में हुई सुनवाई में भी नहीं पहुंचा आरोपी
विवाहिता रिंकी का कहना है कि उसने 13 जुलाई 2020 को कोतवाली रुद्रपुर में लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद 15 जुलाई को एसएसपी, डीआईजी, राज्य महिला आयोग को प्रार्थना पत्र दिए थे। महिला हेल्पलाइन में काउंसलिंग के लिए वह तीन बार तारीख में उपस्थित हुई थी, लेकिन पति एक भी तारीख में नहीं आया था। हेल्पलाइन ने भी प्रार्थना पत्र में रिपोर्ट लगाकर भेजी थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर उसने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था।