भाजपा के चिंतन शिविर में 60 से अधिक सीटों पर जीत के संकल्प के साथ चुनाव को लेकर 180 दिनों का खाका तैयार करने के लिए गंभीर मंथन किया गया। तय किया गया कि सधी रणनीति के तहत मीडिया और सोशल मीडिया का अधिक से अधिक प्रयोग किया जाएगा। इसके साथ ही पन्ना प्रमुखों के दायित्व बढ़ाने के साथ ही बूथों की मजबूती पर पूरा फोकस रहेगा।
चिंतन शिविर का पूरा मकसद सत्ता पर कब्जा बरकरार रखने की रणनीति बनाना है। इसके लिए पार्टी यहां तैयार किए जाने वाले रोडमैप के क्रियान्वयन में पूरी ताकत के साथ जुटने जा रही है। हालांकि पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय के अभाव को गंभीरता से लिया गया है। साफ संदेश दिया गया है कि आपसी तालमेल मजबूत रखें और एकजुट होकर पार्टी की मजबूती के लिए कार्य करें। लोकसभा चुनाव में नियुक्त पन्ना प्रमुखों को फिर से मजबूती से सक्रिय किया जाएगा। माना गया कि पार्टी को लोकसभा चुनाव में मिली जीत में पन्ना प्रमुखों की भी भूमिका थी। कैडर वोट को मजबूत करने, बिखरने से रोकने के साथ ही पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में ये महत्वपूर्ण काम करेंगे।
संगठन के गतिविधियों की निगरानी को लेकर सभी विधानसभा क्षेत्रों में पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त होंगे। धरातल के साथ ही सोशल मीडिया का प्रभावी उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से भी जनता के बीच पार्टी के कार्यक्रम और सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार होगा। चुनाव के मद्देनजर राज्य मुख्यालय में कॉल सेंटर स्थापित होगा। आवश्यकता के अनुसार जिले और विधानसभा क्षेत्रों में भी कॉल सेंटर बनाए जा सकेंगे।
नेताओं की बयानबाजी पर चिंता
रामनगर। नेताओं की बयानबाजी को लेकर चिंता जताई गई। नेताओं को एक दूसरे के खिलाफ और विवादित मसलों पर बयानबाजी नहीं करने की नसीहत भी दी गई।
भाजपा के चिंतन शिविर में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने को लेकर गहन मंथन किया गया। राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष ने स्पष्ट किया कि देवतुल्य कार्यकर्ता ही संगठन की रीढ़ हैं।
कार्यकर्ताओं के बूते ही सत्ता पर पार्टी दोबारा काबिज होगी। लिहाजा कार्यकर्ताओं की उपेक्षा न हो, इसका ध्यान रखा जाए। सभी मंत्री संगठन के कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। सरकार और संगठन में तालमेल बनाए रखेंगे। कार्यकर्ताओं को समय देंगे और उनकी बात भी सुनेंगे।
भाजपा में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का मसला समय-समय पर उठता रहा है। कई बार कार्यकर्ता सुनवाई नहीं होने की शिकायत कर चुके हैं। चुनाव में छह महीने रह गए हैं ऐसे प्रदेश की सत्ता में पकड़ बरकरार रखने के लिए भाजपा कोई चूक नहीं चाहती है।
लिहाजा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा रहे, इसे लेकर काफी चर्चा की गई है। हालांकि बैठक में सरकार की ओर से दायित्व बांटने का मुद्दा नहीं आया मगर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा न हो, इस पर गंभीरता से ध्यान देने का संदेश दिया गया। मंत्रियों से कहा गया कि संगठन और सरकार के बीच तालमेल रखने का कार्य करें। जिलों में दौरे पर जाने पर कार्यकर्ताओं से मिलें और उनकी बात सुनें।