बैंक से आठ लाख रुपये ऋण लेकर उन्होंने कैफे शुरू किया। सेहत के लिए मैदा को अच्छा नहीं माना जाता। इसी बात में जसवीर को रोजगार का आइडिया नजर आया। उन्होंने मैदा के बजाय मंडुवे से पिज्जा और बर्गर जैसे फास्ट फूड बनाने शुरू किए। वहीं, रविवार के दिन उनके कैफे में शहद के साथ मंडुवे की रोटी परोसी जाती है, जिसे लोग शौक से खाते हैं।
कैफे में नहीं कोई नौकर, कर्मचारी, सब बराबर
जसवीर के कैफे में सात और युवक काम करते हैं। जसवीर का कहना है कि उनके कैफे में नौकर-मालिक की भावना नहीं है। सभी कैफे की ड्रेस में रहते हैं। इन युवाओं को कुल आमदनी में से पूरी हिस्सेदारी दी जाती है। कैफे में जब मर्जी आओ, जब मर्जी जाओ के साथ काम करने की पूरी आजादी है। बताया कि प्रतिमाह 90 हजार रुपये की आमदनी के साथ सालाना 10.80 लाख रुपये तक कमाई हो जाती है।
कोविड में होम डिलीवरी ने संभाला
जसवीर का कैफ पूरे शहर में होम डिलीवरी सुविधा देता है। जसवीर बताते हैं कि पिछले साल लॉकडाउन से काम पर फर्क पड़ा था। लेकिन फिर होम डिलीवरी पर फोकस करने से काफी मदद मिली। बताया कि वह शहर के साथ गंगोरी, नेताला, तेखला व मातली तक होम डिलीवरी करते हैं।