डॉ. मिश्रपुरी ने बताया कि यदि गुरु नीच राशि मकर में, वक्री, अतिचारी हो तो संन्यास दीक्षा, देव यात्रा, व्रत, नियम, यज्ञ, वेद दीक्षा, विवाह, गंगा स्नान, देव प्रतिष्ठा आदि कोई भी कार्य नहीं होता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष में गुरु 20 नवंबर से 5 अप्रैल 2021 तक मकर राशि में होंगे।
इसमें भी 13 जनवरी 2021 से 13 फरवरी 2021 तक गुरु अतिचारी होंगे। उत्तर भारत में देव उत्थान एकादशी के बाद विवाह प्रारंभ हो जाते हैं, लेकिन इस बार गुरु के परम नीच अंशों में होने के कारण शुभ विवाह नहीं होंगे। ऐसे में सालभर से कोरोना काल के कम होने पर नवंबर या दिसंबर में विवाह रचाने का इंतजार कर रहे लोगों को निराशा हाथ लगेगी।