जीवनभर पेड़ों को बचाने की लड़ाई लड़ने वाले सुंदरलाल बहुगुणा आखिरकार उन्हीं पेड़ों में विलीन हो गए। वन, पर्यावरण के प्रति उनके प्रेम को देखते हुए उनकी अस्थियां सुंदरवन में पेड़ों की जड़ों में विसर्जित की गई। यहां 2010 में उन्होंने खुद पहला पौधा लगाया था, जो आज घने जंगल के रूप में बदल चुका है।