विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय स्टेट बैंक द्वारा प्रायोजित ग्रामीण बैंकों ने शुक्रवार को प्रदेशव्यापी हड़ताल की। 286 शाखाओं में अधिकारी व कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया। इस दौरान 150 करोड़ का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है।
उत्तराखंड ग्रामीण बैंकों में आयोजित धरने में अधिकारी व कर्मचारियों ने एसबीआई प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। उत्तराखंड ग्रामीण बैंक अधिकारी संगठन के महासचिव भुवनेंद्र बिष्ट ने कहा कि संगठन लंबे समय से विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष करता आ रहा है, लेकिन प्रबंधन ने ग्रामीण बैंकों के अधिकारी-कर्मचारियों की सुध नहीं ली।
कहा कि वे ग्रामीण बैंकों के स्टाफ को प्रायोजक बैंकों की भांति समान लोन की सीमा बढ़ाने व समान ब्याज दर एवं पुनर्भुगतान अवधि लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा मानव संसाधनों का प्रावधान ग्रामीण बैंकों के बोर्ड पर छोड़ने, रिक्त पदों को भरने, कार्यालय सहायक की भर्ती, प्रायोजक बैंकों में स्केल-5 के स्थान पर ग्रामीण बैंकों के अधिकारियों को वरीयता देकर प्रायोजक बैंकों से प्रतिनियुक्ति कम से कम करने व अन्य मांगें शामिल हैं।
बिष्ट ने कहा कि प्रदेशभर में हुई हड़ताल से प्रदेशभर में 150 करोड़ व देशभर में 3000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है। धरने में सचिव श्याम शर्मा, अध्यक्ष प्रदीप वर्मा, संजय कुमार, मदन सिंह, अजय हटवाल, विजय चौहान, जय प्रकाश आदि शामिल रहे।
कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
उत्तरांचल बैंक इंप्लॉइज यूनियन के बैनर तले कर्मचारियों ने प्रबंधन के अड़ियल रवैये के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन देहरादून इकाई के संयुक्त मंत्री चंद्रकांत जोशी ने कहा कि संगठन कर्मचारियों के भत्तों में विसंगति व असमानता को खत्म करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
प्रबंधन हठपूर्ण रवैया अपनाए हुए है। इससे कर्मचारियों में गुस्सा पनप रहा है। इसके बाद कर्मचारियों ने आंचलिक प्रबंधक से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में एसएस रजवाड़, कुलदीप सिंह, सनी कुमार, अनिल जैन, ललित बडोनी, इंदर सिंह, विनय शर्मा, बंटी कुमार, आरके गैरोला, रिंकी तोमर, अनुकृति जायसवाल, यशवीर सिंह शामिल रहे।