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उत्तराखंड : एसटीएफ ने पकड़ा फर्जी अंतर्राष्ट्रीय कॉल सेंटर, देहरादून में बैठकर अमेरिका के लोगों से कर रहे थे ठगी

Sat, 26 Jun 2021 02:56 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

डीआईजी एसटीएफ डॉ. निलेश आनंद भरणे ने बताया कि पिछले दिनों पटेलनगर क्षेत्र में एक फर्जी कॉल सेंटर की जानकारी मिली थी।
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विस्तार
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एसटीएफ ने पटेलनगर थाना क्षेत्र में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर को पकड़ा है। यहां से दो शातिर ठगों को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों ठग अमेरिका के लोगों के कंप्यूटर पर गड़बड़ी का एक मैसेज भेजते थे, जिसे ठीक करने के एवज में उनसे धन ठगते थे। उनकी एक सहयोगी अमेरिका में भी रह रही थी। एसटीएफ ने दून में छह माह के भीतर इस तरह का तीसरा कॉल सेंटर पकड़ा है। 

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डीआईजी एसटीएफ डॉ. निलेश आनंद भरणे ने बताया कि पिछले दिनों पटेलनगर क्षेत्र में एक फर्जी कॉल सेंटर की जानकारी मिली थी। इस सूचना पर डीएसपी एसटीएफ की अगुवाई में गुरु रामराय पीजी कॉलेज के पास एक फ्लैट में छापा मारा गया। इसमें दो युवक मौजूद थे। इन युवकों से पूछताछ की गई तो पता चला कि ये डेस्कटॉप और लैपटॉप से अमेरिका के लोगों के सिस्टम में खराबी का मैसेज भेजते थे।

इसके बाद इसे ठीक करने को कहा जाता तो फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बनकर उनसे धन वसूलते थे। इस काम के लिए उन्होंने दो टॉल फ्री नंबर भी खरीदे थे। जैसे ही कोई इन नंबरों पर फोन करता था तो उस व्यक्ति से रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टाल कराया जाता था। 
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गड़बड़ी ठीक करने की एवज में उनसे 100 डॉलर से 900 डॉलर तक वसूल किए जाते थे। पूछताछ में आरोपियों ने अपने नाम वैभव गुप्ता निवासी व्किंस अपार्टमेंट आईएसबीटी के पास और सूद खान निवासी मूलचंद एन्क्लेव पटेलनगर बताया। दोनों आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश पर दोनों को जेल भेज दिया गया। 

ठगों का ही मिलता था टॉल फ्री नंबर 
ठगों ने यह टॉल फ्री नंबर अमेरिका की द रियल पीबीएक्स कंपनी से 100 डॉलर में खरीदे थे। यह नंबर उन्होंने गूगल पर इस तरह से फीड किए हुए थे कि यदि कोई भी सॉफ्टवेयर ठीक कराने के लिए गूगल पर सर्च करेगा तो उसे यही नंबर मिलते थे। ऐसे में लोग आसानी से लोग इन पर विश्वास कर लेते थे। कुछ लोग इन्हें चेक से भी भुगतान करते थे। यह भुगतान को वह अमेरिका में ही अपनी एक साथी के सहयोग से भारतीय खातों में कमीशन काटकर हासिल करते थे। यह चेक रॉयल क्रेडिट यूनियन एंड क्यूबिकल टेक्निकल सर्विसेस के माध्यम से कैश कराए जाते थे। 

एक करोड़ रुपये से ज्यादा हैं खातों में 
एसटीएफ के मुताबिक इस कार्रवाई के बाद इनके खातों के विवरण भी जांचे गए हैं। इनमें देहरादून स्थित बैंक शाखाओं के इनके खातों में एक करोड़ 10 लाख रुपये जमा हैं। इन पर कार्रवाई के लिए ईडी को लिखा जा रहा है। इन्होंने हाल ही में 60 लाख रुपये का एक फ्लैट और 16 लाख रुपये की एक गाड़ी खरीदी है। 

पहले भी दो फर्जी कॉल सेंटर पर हुई थी कार्रवाई 
एसटीएफ की इस साल में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले जनवरी में डीएसपी अंकुश मिश्रा के नेतृत्व में एसटीएफ ने बसंत बिहार क्षेत्र में एक अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर संचालक को गिरफ्तार किया था। इसके माध्यम से सीनियर सिटीजन को बीमा पॉलिसी के नाम पर झांसे में लेकर अमेरिकी नागरिकों से धोखाधड़ी की जाती थी। इसी क्रम में अप्रैल में स्पेशल टास्क फोर्स डीएसपी जवाहर लाल के नेतृत्व में स्पेशल तकनीकी टीम ने एडी बिल्डर्स के नाम से एक कॉल सेंटर पकड़ा था। यह भी अमेरिका निवासियों को सेवा देने और कंप्यूटर में फर्जी वायरस से सिस्टम को नुकसान से बचाने के नाम से धन प्राप्त कर धोखाधड़ी करते थे।

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