उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) के पेपर लीक मामले में अब छात्रों को भी मुल्जिम बनाने की तैयारी है। एसटीएफ ऐसे 50 छात्रों की तस्दीक कर चुकी है, जिन्होंने पेपर खरीदा और नकल कर पास हुए। इनकी संख्या भविष्य में बढ़ भी सकती है। डीजीपी अशोक कुमार ने इस मामले में कुछ जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया है। उनका कहना है कि सुबूत मिलने के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
पेपर लीक मामले में सचिवालय के अपर निजी सचिव सहित पांच सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। चूंकि, यह मामला सीधे-सीधे भ्रष्टाचार का है तो सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी जाएंगी। डीजीपी ने बताया कि पूरे मामले में कड़ियां एक-दूसरे से जुड़ रही हैं। ऐसे में हो सकता है कि और भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी इसमें शामिल हों।
डीजीपी ने कहा कि इस बार पुलिस सिपाहियों की भर्ती परीक्षा भी चल रही है। शारीरिक दक्षता की परीक्षा कराई जा चुकी है। अब लिखित परीक्षा होनी है। इसके अलावा दरोगाओं की भर्ती भी होनी है। आयोग ही इन परीक्षाओं को कराएगा। ऐसे में आयोग को लिखा गया है कि इन परीक्षाओं को जल्द से जल्द कराए ताकि पुलिस में रिक्त पदों को समय से भरा जा सके।
जांच के दौरान कुछ आरोपियों के पास से मोटी रकम भी बरामद हुई है। परीक्षा के प्रश्नपत्रों की लेनदेन में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। ये रुपये विभिन्न लोगों को समय-समय पर दिए गए थे। आरोपियों के पास से कुल 83 लाख रुपये बरामद हुए हैं। इसके अलावा 40-50 लाख रुपये की संपत्तियों का भी पता चला है।
पेपर लीक मामले की जांच में एसटीएफ के 20 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी लगे हैं। डीजीपी ने कहा कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों को 15 अगस्त को सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मामले पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। लगातार उन्हें अपडेट किया जा रहा है। पुलिस को अभी तक किसी ओर से दबाव में नहीं लिया गया है। सरकार पुलिस टीम का सहयोग कर रही है।