सरकार ने श्रीनगर को नगर पालिका से उच्चीकृत करते हुए नगर निगम बना दिया है। शुक्रवार को इसकी अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रदेश का नौवां नगर निगम अस्तित्व में आ गया है।
सचिव शैलेश बगोली की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, नगर निगम श्रीनगर में श्रीनगर और आसपास के 21 क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसका क्षेत्रफल करीब 1257 वर्ग किलोमीटर होगा। श्रीनगर नगर निगम में श्रीनगर पालिका क्षेत्र के अलावा, नकोट, दिगोली, धनचड़ा, चंद्रवाडी, पुंडोरी, वैधगांव, रतड़ा, स्वीत, चोपड़ा लगा स्वीत, कोटेश्वर गूठ, फरासू, सेम, गहड, बगवान लगा चोपड़ा, चोपड़ा, ढामक, पंथ लगा डुंगरीपंथ, डुंगरीपंथ, कलियासोड़ और हैडी क्षेत्र शामिल होंगे। 2011 की जनगणना के मुताबिक, नगर निगम श्रीनगर की आबादी 37,911 है। इससे पहले उत्तराखंड में देहरादून, हल्द्वानी, हरिद्वार, रुद्रपुर, काशीपुर, रुड़की, ऋषिकेश और कोटद्वार नगर निगम हैं।
नगर पालिका और 21 गांवों को मिलाकर निगम का गठन
साल 2021 जाते-जाते श्रीनगर को नगर निगम का तोहफा मिल गया है। प्रदेश के शहरी विकास अनुभाग ने नगर पालिका श्रीनगर और 21 गांवों को मिलाकर नगर निगम श्रीनगर के रूप में उच्चीकृत करने की अधिसूचना जारी कर दी है। नियमानुसार अधिसूचना जारी होने के बाद पालिका बोर्ड भंग हो जाती है और निकाय में चुनाव होने तक प्रशासक की नियुक्ति होती है। इधर, अधिसूचना जारी होने पर भाजपाइयों और कई पालिका सभासदों ने प्रदेश सरकार का आभार जताया है।
साल के आखिरी दिन 31 जुलाई को शहरी विकास सचिव (प्रभारी) विनोद कुमार सुमन ने नगर निगम की अधिसूचना जारी कर दी। अधिसूचना के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार नगर पालिका श्रीनगर की आबादी 33 हजार 449 और राजस्व ग्रामों की जनसंख्या 4 हजार 442 है। नगर निगम में जनगणना 2011 के अनुसार कुल 37 हजार 911 की आबादी शामिल होगी।
यहां बता दें कि कई गांवों की जनता नगर निगम में शामिल करने के विरोध में थे। इसके लिए जन सुनवाई भी हुई। मामला हाईकोर्ट भी गया। सारी आपत्तियों के निस्तारण के बाद शासन ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर दी। भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष गिरीश पैन्यूली, सभासद अनूप बहुगुणा, विभोर बहुगुणा, डॉ. विनीत पोस्ती व सूरज ने नगर निगम का दर्जा मिलने पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि यह पहाड़ का पहला नगर निगम है। निगम बनने से क्षेत्र का विकास होगा।
यह राजस्व ग्राम हो रहे शामिल
नकोट, दिगोली, धनचड़ा, पुंडोरी, चंद्रवाणी, वैधगांव, रतूड़ा, स्वीत, चोपड़ा लगा स्वीत, कोटेश्वर गूठ, फरासू, सेम, गहड़, बगवान लगा चोपड़ा, चोपड़ा, ढामक, डुंगरीपंथ, पंथ लगा डुंगरीपंथ, कलियासौड़, हैड़ी व धौड़ा लगा उफल्डा।
अधिसूचना जारी होते ही निकाय बोर्ड भंग हो जाता है। अभी मैं अधिसूचना का अध्ययन कर रहा हूं। अग्रिम कार्रवाई अधिसूचना में दिए गए निर्देश के अनुसार की जाएगी।
-डॉ. विजय जोगदंडे, डीएम पौड़ी