प्रदेश में पोलिंग स्टेशनों की संख्या में आई गिरावट
प्रदेश में पोलिंग स्टेशनों की संख्या में कमी हो गई है। वहीं, चुनाव आयोग ने उत्तराखंड सहित चार राज्यों में ईआरपी का नया सॉफ्टवेयर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया है, जिससे मतदाताओं को भी एक विधानसभा से दूसरी में जाने में आसानी होगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी सी रविशंकर ने बताया कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव में 11 हजार 647 पोलिंग स्टेशन थे। नए सिरे से इनमें कसरत की गई, जिसके बाद अब इनकी संख्या 11 हजार 574 रह गई है। दो किलोमीटर से अधिक पैदल दूरी के 42 मतदेय स्थल हैं।
1500 से अधिक संख्या होने पर चार नए मतदेय स्थल प्रस्तावित किए गए हैं। 119 एक ही भवन में एक से अधिक मतदेय स्थलों का समायोजन किया गया है। 1500 से अधिक मतदाता होने के चलते 63 मतदेय स्थलों का दूसरे में समायोजन किया गया है। 172 मतदेय स्थल ऐसे हैं, जिसमें शिक्षण संस्थान का नाम परिवर्तन आदि हुआ है। 64 पोलिंग स्टेशन ऐसे हैं, जिनके भवन जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं। 73 मतदेय स्थल कम होने के बाद प्रदेश में 11 हजार 574 रह जाएंगे।
संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रताप शाह ने बताया कि चुनाव आयोग ने उत्तराखंड, असम, गोवा और बिहार में ईआरओ नेट वर्जन 2.0 बतौर पायलट प्रोजेक्ट लांच किया है। इस बार का पूरा अभियान इसी सॉफ्टवेयर के माध्यम से चलेगा। बताया जा रहा है कि इस एडवांस सॉफ्टवेयर के आने के बाद मतदाताओं और निर्वाचन विभाग के लिए काफी सहूलियतें हो जाएंगी।