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Uttarakhand: राजकीय मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए बनेगी SOP, नए साल से लागू होगी नई व्यवस्था

Wed, 04 Dec 2024 09:10 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

एसओपी में डॉक्टरों से लेकर कर्मचारियों के कार्य दायित्वों के निर्वहन की स्पष्ट रूपरेखा तैयार की जाएगी। इसका पालन प्रत्येक डॉक्टर व कर्मचारी को अनिवार्य रूप से करना है।
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बैठक लेते स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजकीय मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाई जाएगी। इसमें प्राचार्य से लेकर जूनियर डॉक्टरों तक के कार्यदायित्व तय किए जाएंगे। डॉक्टरों व कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से बायोमेट्रिक उपस्थिति लगानी होगी। भर्ती मरीजों को प्रतिदिन दिए जाने वाले भोजन संबंधी मेन्यू वार्ड के बाहर चस्पा करना होगा। यह व्यवस्था नए साल से लागू कर दी जाएगी।

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यमुना कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एसओपी में डॉक्टरों से लेकर कर्मचारियों के कार्य दायित्वों के निर्वहन की स्पष्ट रूपरेखा तैयार की जाएगी। इसका पालन प्रत्येक डॉक्टर व कर्मचारी को अनिवार्य रूप से करना है। जो एसओपी के उल्लंघन का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एमएल ब्रह्म भट्ट, अपर सचिव चिकित्सा शिक्षा नमामि बंसल, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना, दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन, हरिद्वार मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य रंगील सिंह रैना, अपर निदेशक डॉ. आरएस बिष्ट, संयुक्त निदेशक डॉ. एमसी पंत मौजूद रहे।

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प्रतिदिन बदलनी होगी बेड की चादर
डा. रावत ने कहा, मरीजों को किसी भी प्रकार के संक्रमण से दूर रखने के लिए प्रत्येक दिन भर्ती मरीजों के बेड की चादर बदलनी होगी। इसके लिए सप्ताह में सात दिन के लिए चादरों का अलग-अलग रंग निर्धारित किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज व अस्पतालों में साफ-सफाई व्यवस्था बनना वार्ड के नर्सिंग इंचार्ज व कालेज के अधीक्षक की जिम्मेदारी होगी।

मरीजों से मिलने का समय निर्धारित होगा
अस्पताल में भर्ती मरीजों से मिलने का समय निर्धारित किया जाएगा। विशेषकर आईसीयू व जच्चा-बच्चा वार्ड में भर्ती मरीजों से मिलने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। एक मरीज के साथ एक ही तीमारदार वार्ड के अंदर प्रवेश कर सकेगा। मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की भी लगातार निगरानी की जाएगी। यह नई व्यवस्था सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों में एक जनवरी 2025 से लागू की जाएगी। इसके लिए सभी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्यों के साथ ही निदेशक चिकित्सा शिक्षा को निर्देश दिए। मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल, टेक्नीशियन व वार्ड बॉय की आउटसोर्सिंग के माध्यम से तैनाती की जाएगी।
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