इसी को देखते हुए वन विभाग ने इस क्षेत्र में करीब 40 कैमरा ट्रेप लगाए हैं। मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक जेएस सुहाग ने इसकी पुष्टि की। सुहाग के मुताबिक अभी पहले चरण का काम ही शुरू हुआ है। आगे कैमरा ट्रेप की संख्या और बढ़ाई जाएगी।
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के मुताबिक उच्च हिमालयी क्षेत्र मेें सीमांत क्षेत्र होने के कारण सेना की मौजूदगी लगातार बनी रहती है। इसी वजह से इस बार गणना में सेना की भी मदद ली जाएगी।
भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से भी गणना के लिए विस्तृत प्लान तैयार किया गया है। यह काम तीन चरणों में होगा। पहले चरण में हिम तेंदुओं के आवास क्षेत्र का निर्धारण किया जाएगा। इसके लिए सर्वे से लेकर अन्य तकनीकों का सहारा लिया जाएगा।