शासन ने मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार की नियुक्ति का आदेश रद्द कर दिया है। इस पद पर पत्रकार दिनेश मानसेरा की नियुक्ति की गई थी। इससे पहले कि वह कार्यभार ग्रहण करते, बेहद नाटकीय ढंग से उनकी नियुक्ति का आदेश निरस्त कर दिया गया।
सचिवालय प्रशासन अधिष्ठान ने 17 मई को मानसेरा को मुख्यमंत्री कार्यालय में मीडिया सलाहकार नियुक्त करने का आदेश जारी किया था। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने मंगलवार को ही मीडिया सलाहकार की नियुक्ति का आदेश निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया था।
नियुक्ति के साथ ही सक्रिय हो गई विरोधी लॉबी
मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार बनाए जाने के बाद पत्रकार दिनेश मानसेरा के खिलाफ एक लॉबी सक्रिय हो गई थी। उनके ट्विटर और फेसबुक से पुरानी पोस्टें खंगाली गईं। इनमें कुछ पोस्ट ऐसी थी, जिन्हें भाजपा, मोदी व प्रदेश सरकार के खिलाफ बताया गया। चंद घंटों में ये सारी पोस्टें मुख्यमंत्री तक पहुंच गईं। पार्टी के कुछ मंत्री व विधायक भी मीडिया सलाहकार की नियुक्ति से असहमत माने गए। चर्चा है कि मोदी सरकार को निशाने पर रखने वाले एक टीवी चैनल का पत्रकार होना भी मानसेरा के खिलाफ गया।
नियुक्ति कराने में एक वरिष्ठ भाजपा नेता के नाम की चर्चा
पत्रकार दिनेश मानसेरा को मुख्यमंत्री का मीडिया सलाहकार बनाए जाने के बाद सियासी हवाओं में यह सवाल भी तैरता रहा कि आखिर उनकी नियुक्ति किसने कराई। मानसेरा का आरएसएस के साथ पुराना नाता है। वह संघ के मुखपत्र पांचजन्य के रिपोर्टर भी रहे हैं। उनकी नियुक्ति के पीछे संघ और पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का हाथ माना जा रहा है।
सबकी गरिमा बनी रहे, मैं पद अस्वीकार करता हूं: मानसेरा
नियुक्ति रद्द होने के बाद सोशल मीडिया पर पत्रकार दिनेश मानसेरा की एक पोस्ट वायरल हुई। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा- जब हम ऐसे लोगों से घिरे रहेंगे, जो हमें काम ही नहीं करने देंगे तो ऐसे माहौल में काम करने का कोई औचित्य नहीं। मुझे पद की लालसा कभी नहीं रही। मान सम्मान सबका जरूरी है, जो कायम रहना चाहिए। मैं स्पष्ट मानता हूं कि जब तक कार्यसंस्कृति न हो, वहां सब बेमानी है। इसलिए सबकी गरिमा बनी रहे, मैं इस पद को अस्वीकार करता हूं।
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने मुझे मीडिया सलाहकार बनाया। जब मैं देहरादून पहुंचा तो उससे पहले ही सोशल मीडिया पर मेरे बारे में बहुत कुछ उछाला गया। जबकि मेरी नियुक्ति के पीछे मेरी योग्यता, मेरा पत्रकारिता अनुभव, व्यवहार, लोगों की भलाई आधार थी। इन सब बातों से सीएम साहब को भी कष्ट पहुंच रहा है। मुझे बुलाने और अपनी टीम में रखने का निर्णय उनका ही था। मुझे आभास है कि वह सरल सज्जन व्यक्ति हैं।