इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग के वैज्ञानिकों ने बताया कि भागीरथी, मंदाकिनी, अलकनंदा नदियों के निकट ग्लेशियर झीलों की निगरानी की जा रही है। जिसमें पाया गया कि केदारताल, भिलंगना व गौरीगंगा ग्लेशियर का क्षेत्र निरंतर बढ़ता जा रहा है। जो कि आने वाले समय में आपदा के जोखिम के प्रति संवेदनशील है।
ग्लेशियर झीलों के अध्ययन में कार्यरत संस्था सीडैक के विशेषज्ञों ने बताया कि उन्होंने सिक्किम के तीन प्रभावित ग्लेशियर झीलों का अध्ययन करने के लिए खुद का अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया है। झीलों की गहराई नापने के लिए बेथिमेट्री सर्वे किया गया, जिससे प्राप्त आंकड़ों से झीलों में हो रहे परिवर्तन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है।
सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा ने निर्णय लिया कि ग्लेशियरों की निगरानी के लिए एक बहुक्षेत्रीय विशेषज्ञ टीम गठित की जाएगी। जिसमें उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नोडल विभाग के रूप में काम करेगा। यह ग्लेशियर झीलों का अध्ययन करेगी और इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। केंद्र से मार्गदर्शन प्राप्त किया जाएगा कि ग्लेशियर झीलों से पैदा होने वाली आपदाओं का प्रभावी नियंत्रण कैसे हो।