डॉ. बिष्ट ने अमर उजाला को बताया, स्पष्ट तौर पर परियोजना नदी के बीच में बनाई जा रही थी। इसके लिए स्थान का चयन गलत किया गया था। उनकी रिपोर्ट के बावजूद इतनी बड़ी परियोजना के इस नुकसान का जिम्मेदार कोई अफसर नहीं है।
कहा, पेयजल निगम का रवैया ऐसा है कि इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हां, इतना जरूर है कि अब इसी परियोजना के लिए नई जगह की तलाश की गई है, जिस पर निर्माण के लिए नए सिरे से प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।