सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपये बकाया होने और बेतहाशा बिजली के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने के लिए ऊर्जा निगम के प्रीपेड मीटर लगाने के आदेश भी हवाई साबित हुए हैं।
एक साल भी मुख्य सचिव के आदेश फाइलों में घूम रहे हैं। मुख्य सचिव के आदेश को न तो सरकारी विभागों ने गंभीरता से लिया और न ही पावर कॉरपोरेशन ने। यह हाल तब है जब ऊर्जा निगम का सरकारी विभागों पर 523 करोड़ रुपये बकाया है।
दरअसल, राज्य के सरकारी कार्यालयों में बेतहाशा बिजली के इस्तेमाल की बात अक्सर सामने आती है। बिजली की बचत को लेकर न तो विभागीय अधिकारी और न ही कर्मचारी संवेदनशील हैं। सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य जैसे सरकारी विभागों में बड़े पैमाने पर बिजली का इस्तेमाल होता है।
ऐसे में विद्युत नियामक आयोग के निर्देश के बाद तय किया गया कि सरकारी विभागों में बिजली के बेतहाशा इस्तेमाल पर अंकुश लगाने के लिए 25 किलोवाट तक के कनेक्शनों में प्रीपेड मीटर लगाए जाएं।
इसके लिए 23 सिंतबर 2019 को तत्कालीन मुख्य सचिव उत्पल कुमार ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, जिलाधिकारी व सभी विभागाध्यों को पत्र लिखकर निर्देश जारी किए थे। पावर कॉरपोरेशन को प्रीपेड मीटर लगाने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे, लेकिन एक साल बाद भी मुख्य सचिव के आदेश फाइलों में ही कैद हैं।
विभागों पर लगातार बढ़ रहा बकाया
यूपीसीएल का बिजली बिलों का बकाया लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी और गैर सरकारी विभागों पर बकाया 22 सौ करोड़ से भी अधिक पहुंच गया है। इसमें सरकारी विभागों पर ही 523 करोड़ रुपये बकाया हैं। वहीं गैर सरकारी विभागों पर 1764 करोड़ रुपये बकाया है।
किस पर कितना बकाया
घरेलू उपभोक्ता 682 करोड़
व्यावसायिक 358 करोड़
निजी नलकूप 158 करोड़
छोटी इंडस्ट्री 44 करोड़
बड़ी इंडस्ट्री 308 करोड़
हैवी इंडस्ट्री 199 करोड़
सरकारी विभागों में प्रीपेड मीटर की योजना को किस प्रकार अमलीजामा पहनाया जाए इस पर मंथन चल रहा है। यह तभी संभव है जब सरकारी विभाग बकाया राशि का पूरा भुगतान करें। जब बकाया राशि का भुगतान और प्रीपेड मीटर के लिए अग्रिम भुगतान नहीं होगा, तब तक यह संभव नहीं है। हालांकि, इस संबंध में सभी सचिवों, विभागाध्यक्षों को पत्र भेजे जा रहे हैं।
- अतुल कुमार अग्रवाल, डायरेक्टर ऑपरेशंस