साइबर सेल में हर दिन कम से कम तीन से चार शिकायतें इस तरह की आ रही हैं। जिले की साइबर सेल प्रभारी नरेश राठौर ने बताया कि यह इन दिनों नया तरीका है। इससे ठग आसानी से लोगों को शिकार बना रहे हैं।
यही नहीं इससे अलग साइबर थाने को भी हर दिन कम से कम तीन से चार शिकायतें क्यूआर कोड से ठगी के संबंध में मिल रही हैं। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि क्यूआर कोड से होने वाली ठगी से बचा जा सकता है। लेकिन, इसके लिए पहले सब बातों का ध्यान रखना होगा।
सिर्फ पेमेंट दिया जा सकता है
जापानी कंपनी डेंसो वेव ने क्यूआर कोड का आविष्कार किया था। इसकी मदद से केवल भुगतान किया जा सकता है। यह एक तरह का बारकोड है, जिसे मशीन के जरिए पढ़ लिया जाता है। इससे आप बिजली, पानी, पेट्रोल, डीजल, किराना सामान, यात्र आदि का भुगतान इस माध्यम से कर सकते हैं।
कई बार फिशिंग ईमेल, टेक्स्ट या फिर इंटरनेट के जरिए नकली क्यूआर कोड भेजा जाता है। फर्जी कोड को स्कैन करने पर यूजर को ओरिजनल की तरह दिखने वाले पेज पर ले जाया जाता है।
वहां पीआईआई (पर्सनल आइडेंटिफिएबल इंफॉर्मेशन) दर्ज करके लॉग इन करने के लिए कहा जाता है। यहां से आपकी संवेदनशील जानकारी को चोरी किया जा सकता है या फिर वायरस को भी डिवाइस में ट्रांसफर किया जा सकता है। एक बात ध्यान रखने वाली है कि बिना स्कैन इसके अंदर मौजूद जानकारी को पढ़ने का तरीका नहीं है।
ऐसे बरतें सावधानी
- यदि भुगतान करने के लिए क्यूआर कोड का उपयोग कर रहे हैं, तो भुगतान की पुष्टि करने से पहले आने वाले डायलॉग पर ध्यान दें। जल्दबाजी की तो नुकसान होगा।
- क्यूआर कोड को एक लिंक की तरह ही मानें। अगर नहीं जानते हैं कि यह कहां से बना है तो स्कैन बिल्कुल न करें।
- जब क्यूआर स्कैन करते हैं, तो इससे जुड़े यूआरएल को देखने के लिए एक पॉप-अप आता है। यदि कोई यूआरएल नहीं है या फिर एक छोटा लिंक (bit.ly के जैसा) दिखता है, तो सतर्क रहें।
- डिवाइस को सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर से हमेशा अपडेट रखें। यदि किसी भी गतिविधि पर संदेह है, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें और लॉग इन आईडी को बदल दें।
- यदि इनमें से कुछ भी आपके साथ होता है तो तो राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, साइबर सेल आदि को भी शिकायत की जा सकती है।