बजट का आकार बढ़ाने का हौसला प्रदेश सरकार को 15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों से भी मिला है। 28 हजार करोड़ का राजस्व घाटा अनुदान इस बार सरकार को मिला है। आपदा प्रबंधन में भी सरकार को खासी धनराशि मिली है। इसके साथ ही जीएसटी की माह की सौ करोड़ से अधिक की क्षतिपूर्ति मिलना भी एक कारण है।
कोरोना काल में लगा था झटका, केंद्रीय अनुदान का मिला सहारा
लॉक डाउन के कारण प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर शून्य से भी कम हो गई थी। जीएसटी से आय भी निम्नतम स्तर पर रही। इतना होने पर भी केंद्रीय अनुदान की बढ़ी हुई राशि ने सरकार के बजट को संभाले रखा।
राजकोषीय घाटे को संभालने की है चुनौती, खास मुश्किल भी नहीं
कोरोना काल में राजकोषीय घाटे को भी सरकार संभालने में सफल रही थी। सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी के 3.5 प्रतिशत से यह अधिक नहीं हुआ। इस बार के बजट से भी जाहिर है कि सरकार को इस मोर्चे पर अधिक चिंता नहीं करनी होगी। वर्ष 2020-21 केे बजट में सरकार ने करीब 7500 करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया था। सत्र में एफआरबीएम के तहत घोषित होने वाले अनुमान से तस्वीर पूरी तरह से साफ होगी।