मौजूदा समय में करीब 600 लोग मत्स्य पालन से जुड़े हुए हैं। जबकि आठ समितियां और 30 काश्तकार अपनी भूमि पर ट्राउट मछली के 122 तालाब तैयार कर रहे हैं। काश्तकारों को जिला प्रशासन की ओर से फिश आउटलेट और फिश कैफे के माध्यम से मछली बिक्री केंद्र की सुविधा भी दी गई है।
दून में उत्तराफिश नाम से बिक रही ट्राउट
चमोली जिले में उत्पादित ट्राउट मछली देहरादून में उत्तराफिश के नाम से बेची जा रही है। देहरादून के मछली व्यापारी खुद ही काश्तकारों से मछली खरीदने के लिए यहां पहुंच रहे हैं। मत्स्य पालन में जुटे काश्तकार मोहन सिंह का कहना है कि ट्राउट मछली की डिमांड बढ़ रही है। जिले के स्थानीय बाजारों में भी मछली की अच्छी डिमांड है।
ठंडे इलाकों में होता है उत्पादन
ट्राउट मछली ठंडे इलाकों में उत्पादित होती है। उत्तराखंड में चमोली के अलावा रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी जैसे जनपदों में ट्राउट मछली का उत्पादन होता है। बाजार में एक किलो मछली 800 रुपये तक बिक रही है। प्रभारी निदेशक मत्स्य जगदंबा प्रसाद का कहना है कि ऊंचाई वाले इलाकों की वे नदियां जिनमें पानी तेजी से बहता है और जिन नदियों का पानी बहुत ठंडा होता है, उनमें में ही ट्राउट मछलियां पाई जातीं हैं।