गर्मियों की छुट्टियों के बाद बिना बच्चों के खुले स्कूलों में शिक्षक ऑनलाइन व्यवस्था से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। बच्चों की ओर से ऑनलाइन क्लास और होमवर्क में किए काम की कॉपियों की जांच कराने के लिए अभिभावकों को स्कूल की दौड़ लगानी पड़ रही है। कोरोना काल में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल प्रबंधन की ओर से कॉपियां जांच कराने के लिए अभिभावकों को बुलाया जा रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि कोरोना काल में शुरू हुई ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों की लिखाई बिगड़ने के साथ लिखने की आदत भी छूटने लगी है। इतना ही नहीं ऑनलाइन पढ़ाई से लिखने की रफ्तार भी कम हुई है। ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों की हिंदी भाषा भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में बच्चों की लिखने और पढ़ने की आदत बनाए रखने के लिए स्कूल प्रबंधन की ओर से यह फैसला लिया गया है कि बच्चों के काम की कॉपियां अभिभावकों की ओर से जांच कराई जाएं।
अभी बच्चों को स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं
अभिभावक कॉपियां जांच कराने के लिए बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं हैं। जाखन निवासी मुकेश सैनी ने कहा कि विशेषज्ञ कोरोना की तीसरी लहर आने की बात कर रहे हैं। ऐसे में अभी बच्चों को स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं है। हम खुद ही सप्ताह में एक दिन स्कूल जाकर बच्चों की कॉपियां चेक करा रहे हैं। स्थिति सामान्य न होने तक यह व्यवस्था अच्छी है।
यहां न बच्चे आ रहे न अभिभावक
हिंदी मीडियम स्कूल में कॉपियां चेक कराने के लिए न बच्चे आ रहे हैं न उनके अभिभावक। शिक्षकों का कहना है कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं और काम में जाने के चलते वह खुद भी स्कूल नहीं आ पा रहे हैं। राजपुर रोड स्थित एक सरकारी स्कूल की प्राचार्य ने बताया कि बहुत कम बच्चे अपनी कॉपियां चेक कराने के लिए आ रहे हैं। जबकि, अभिभावक तो स्कूल ही नहीं आ रहे हैं।
ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों की लिखाई व लिखने की आदत बनी रहे और हिंदी भाषा भी प्रभावित न हो इसके लिए शिक्षक ऑनलाइन क्लास में बच्चों को काम भी दे रहे हैं। वहीं, कोरोना काल में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कॉपियां जांच के लिए अभिभावकों को ही बुलाया जा रहा है। सप्ताह में एक दिन अभिभावक स्कूल में कॉपियां जमा करा रहे हैं।
- मिनाक्षी जैन, उपायुक्त, केवि संभाग देहरादून