वर्चुअल माध्यम से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पंचायतें आज लोकतंत्र की मूलभूत इकाइयां हैं, जो सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। विशेषकर देवभूमि में लोगों तक विकास पहुंचाने और उसमें सबकी सहभागिता सुनिश्चित करने में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है। इसकी मजबूती का रास्ता ग्राम पंचायत से होकर आता है। इसलिए हमें गांवों के आर्थिक हालातों को और मजबूत करना होगा। ग्राम विकास में भी पंचायतों की विशेष भूमिका है। उन्होंने ग्राम प्रधानों को सुझाव दिया कि उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में सुरक्षा करने वाले प्रहरियों से जाकर मिलें और उनका मनोबल बढाएं। --
भारत को श्रेष्ठ बनाना है तो सोच बड़ी रखनी होगी : निशंक
केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि यदि हमें गांवों, समाज और भारत को श्रेष्ठ बनाना है तो हमें बड़ी सोच रखनी पड़ेगी। वह सम्मेलन के दूसरे सत्र उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों और उनके संरक्षण संवर्द्धन में पंचयायती राज संस्थाओं की भूमिका विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने ऑनलाइन जुड़े जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे प्रधानमंत्री के सुझाए आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए ईमानदारी, पारदर्शिता के जज्बे के साथ जुटें।
पंचायतों में ई गर्वनेंस का प्रयोग जरूरी : प्रेमचंद
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से हम विकेंद्रीकृत लोकतंत्र को अत्यधिक बलशाली बना सकते हैं। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का आज के युग में तेजी से प्रयोग किया जा रहा है। देश की सभी विधायिका में ई-विधान सभा लागू की जा रही है। पंचायतों के कार्यों में भी ई-गवर्नेंस के प्रयोग से यह संस्थाएं और बल प्राप्त करेंगी।
पंचायत से संसद तक लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों के प्रति लोगों की अपेक्षाएं एवं आकांक्षाएं बढ रही हैं और साथ ही उनके दायित्व भी बढ़े हैं।
- अरविंद पांडेय, पंचायती राज मंत्री, उत्तराखंड
जनप्रतिनिधियों को अपने दायित्वों, अधिकारों और पंचायतीराज की क्रियाविधि को गहराई से समझना होगा, ताकि वे बेहतर ढंग से कार्य कर सकें।
- डॉ. धनसिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री
पंचायत प्रतिनिधियों में नेतृत्व का विकास करने के लिए उन्हें प्रबंधन, संसधानों की मैपिंग और नियोजन की जानकारी भी देनी होगी।
- मुन्ना सिंह चौहान, विधायक
जल, जंगल और वायु जीवनदायी त्रिवेणी हैं, हमें इन्हें संजोना होगा। साथ ही गांव की संस्कृति, विरासत, परंपरागत उत्पाद, बीज, बोली भाषा पर आए संकट को समझना होगा और उसका निदान करना होगा।
- पद्मश्री डॉ.अनिल जोशी, गांव बचाओ आंदोलन के सूत्रधार