लंबे समय से चल रही कवायद के बीच शासन ने चार नई नगर पंचायतों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। अब थलीसैंण, ढंडेरा, लालपुर और गरुड़ के नगर पंचायत बनने के बाद प्रदेश में नगर निकायों की संख्या बढ़कर 94 हो गई है।
यह भी माना जा रहा है कि जल्द ही सरकार कुछ और नए नगर निकायों का गठन कर सकती है। पूर्व में नौ नगर निकायों के प्रस्ताव अलग-अलग जिलों से प्राप्त हुए थे। जिसके बाद गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में चार को नगर पंचायतों का दर्जा दे दिया गया।
गरुड़ नगर पंचायत की अधिसूचना जारी, 5002 होगी आबादी
नवगठित गरुड़ नगर पंचायत की आबादी 5002 होगी। नगर पंचायत का गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद चार ग्राम पंचायतों समेत एक बीडीसी सदस्य के निर्वाचन के क्षेत्र का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, जबकि 19 भकुनखोला जिला पंचायत निर्वाचन क्षेत्र का नाम बदल जाएगा।
नगर पंचायत बनाने की मांग वर्षों पुरानी है। नगर पंचायत का दर्जा देने के लिए गरुड़ क्षेत्र के लोगों ने कई बार आंदोलन किए। विधायक चंदन राम दास और भाजपा के जिलाध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट ने नगर के लोगों को आश्वासन दिया था कि गरुड़ को शीघ्र नगर पंचायत का दर्जा दिलाया जाएगा। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जब गैरसैंण को अलग मंडल बनाने की घोषणा की तब उन्होंने गरुड़ नगर पंचायत की घोषणा कर नगर पंचायत के भवन निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे।
अब शासन नगर पंचायत गरुड़ की अधिसूचना जारी कर दी है। नगर पंचायत की कुल आबादी 5002 होगी। नगर पंचायत शामिल गांव भकुनखोला में 885, नौघर में 874, फुलवारीगूंठ में 761, स्याल्देटीट में 383 लोग रहते हैं। इस नगर निकाय में गढ़सेर, सिल्ली, दर्शानी, पाये गांव को आंशिक रूप से शामिल किया गया है। गरुड़ नगर पंचायत के अस्तित्व में आने पर गढ़सेर बीडीसी निर्वाचन क्षेत्र समाप्त हो जाएगा। वहीं नौघर, स्याल्देटीट, भकुनखोला, फुलवारीगूंठ ग्राम पंचायत नगर पंचायत विलीन हो जाएंगी।
पंचायत निर्वाचन क्षेत्रों का भी दोबारा होगा परिसीमन
नगर पंचायत गठन के बाद जिला पंचायत निर्वाचन क्षेत्र 19 भकुनखोला जिले का सबसे छोटा जिला पंचायत निर्वाचन क्षेत्र हो जाएगा। जिला पंचायत निर्वाचन क्षेत्र भकुनखोला से जनार्दन लोहनी निर्वाचित सदस्य हैं। भकुनखोला निर्वाचन क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत होने पर निर्वाचन आयोग जिला पंचायत निर्वाचन क्षेत्र का नाम भकुनखोला रखा। गरुड़ नगर पंचायत के अस्तित्व में आने के बाद निर्वाचन आयोग को सबसे पहले निर्वाचन क्षेत्र का नाम बदलने के साथ ही जिला पंचायत क्षेत्र का सीमांकन भी करना होगा।