गिरोह बनाकर कर रहे थे फर्जीवाड़ा
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सुनीत रावत ने बताया कि रामबृज ने पूछताछ में बताया कि वर्ष 2020 में वह भारतीय सेना की 27 राजपूत रेजीमेंट मे भर्ती हो गया था। उसे मोबाइल पर सट्टा व जुआ खेलने की आदत हो गयी थी। जिस कारण उसके ऊपर काफी लोगों का कर्जा हो गया था। वर्ष 2022 में आर्मी की नौकरी छोड़कर घर आ गया। रामबृज व उसका छोटा भाई विकास अपने साथियों के साथ मिलकर सरकारी नौकरी हेतु विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उन्हें शारीरिक व लिखित परीक्षा में पास कराने का ठेका लेते थे।
रामबृज अभ्यर्थियों के बदले फिजिकल परीक्षा देता था और उसका छोटा भाई विकास व उसके दोस्त प्रतियोगी परीक्षा की लिखित परीक्षाओं में अभ्यार्थी के बदले परीक्षा देते थे एवं उनके अन्य साथी आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास एंव एडमिट कार्ड पर एडिटिंग कर फर्जी दस्तावेज बनाने का काम करते थे। कहा आरोपियों द्वारा अभी तक कई अभ्यर्थियों से लाखों रूपये लेकर उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराया गया है।
धोखाधड़ी कर सरकारी नौकरी लगाने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले से जुड़े अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस गंभीरता से जांच कर रही है। जल्द ही अन्य आरोपी भी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
- लोकेश्वर सिंह, एसएसपी पौड़ी।