पोषण ट्रैकर एप से अब पोषाहार वितरण में हो रही अनियमितताओं पर लगाम लग सकेगी। बाल विकास मंत्रालय की ओर से तैयार कराया गया पोषण ट्रैकर एप की नई व्यवस्था आज से उत्तराखंड में लागू हो जाएगी। राज्य की एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस एप को डाउनलोड कर इसमें महिलाओं व बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार की ऑनलाइन फीडिंग करेंगी।
लाभार्थियों की संख्या अधिक दिखाकर पोषाहार वितरण में होने वाले गोलमाल पर लगाम लगाने की केंद्र सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। एप के माध्यम से ही पोषाहार वितरण पर नजर रखी जाएगी। एप को सीधे केंद्र के सर्वर से जोड़ा गया है। एप पर सभी श्रेणी का पूरा विवरण उपलब्ध होगा।
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इससे केंद्र सरकार की ओर से सीधे महिलाओं व बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार पर नजर रखी जा सकेगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से ऑनलाइन फिडिंग के आधार पर ही राशन का कोटा तय किया जाएगा। उसी हिसाब से ही आंगनबाड़ी केंद्रों में राशन की व्यवस्था की जाएगी। इससे सीधे तौर पर जितने राशन की जरूरत है, उतना ही बच्चों को दिया जाएगा।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगी रजिस्टर के झंझट से निजात
पोषण ट्रैकर एप की जिला समन्वयक अलबेरा फैनी ने बताया कि एप से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के रजिस्टर मेंनटेन करने का झंझट दूर हो जाएगा। एप को डाउनलोड करने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को एम-पिन डालना होगा। उसके बाद उन्हें गर्भवती महिलाएं, कुपोषित बच्चे, अतिकुपोषित बच्चों, बच्चों का वजन आदि सभी तरह की फीडिंग करने होगी। सारा डाटा एप में ही भरना होगा।
पोषण ट्रैकर एप की नई व्यवस्था मंगलवार एक जून से राज्य में लागू हो जाएगी। जिले की 23086 व राज्य की एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण ट्रैकर एप डाउनलोड करना होगा।
-उदय प्रताप सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी।