पर्यटन विभाग सुरक्षा की जिम्मेदारी भी ले
नेशनल एडवेंचर फाउंडेशन के उत्तराखंड चेप्टर के निदेशक मंजुल रावत कहते हैं कि पर्यटन विभाग की ओर से साहसिक गतिविधियों के लिए सभी जिलों में एक-एक अधिकारी तैनात है। ऐसे में ट्रैकिंग के लिए एक सुरक्षित गाइडलाइन बनाने और उसे लागू करने में पर्यटन विभाग को पीछे नहीं हटना चाहिए। मंजुल के मुताबिक स्थानीय ऑपरेटर्स को ट्रैकिंग की ट्रैनिंग देने, सुरक्षा के उच्च तकनीकी संसाधन विकसित करने, इंटरनेट एग्रीगेटर से बचने के भी प्रावधान होने चाहिए। ऐसे लोगों का भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करना चाहिए।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ट्रैकिंग को वन विभाग रेगूलेट करता है। पर्यटन विभाग को एसओपी नहीं बनानी है। यह कार्य वन विभाग को करना है।
- सचिन कुर्वे, सचिव, पर्यटन
मुख्य सचिव के निर्देश के बाद वन विभाग के सहयोग से पर्यटन विभाग उच्च हिमालयी क्षेत्र में ट्रैकिंग के लिए एसओपी तैयार करेगा। दोनों विभाग एक-दूसरे का सहयोग कर यह तय करेंगे कि किस तरह से ट्रैकिंग को रेगूलेट किया जाए।
-आरके सुधांशु, प्रमुख सचिव, वन
उच्च हिमालय क्षेत्र में ट्रेकर्स के लिए सुरक्षा के इंतजाम के प्रति उदासीनता निराशाजनक है। एसओपी कहां है। किसी ने यह जानने का प्रयास किया कि 60 या 70 साल आयु के लोग ऐसे कठिन ट्रैक के लिए क्या फिट हैं। सहस्त्रताल गए दल में एक ट्रैकर 70 वर्ष और तीन 60 वर्ष से अधिक आयु के थे। एसओपी बनाना ही काफी नहीं, उसे जमीन पर उतारना भी जरूरी है।
- अनूप नौटियाल, सामाजिक कार्यकर्ता