राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेनि.) ने कहा कि जोशीमठ के मुद्दे को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पूरी तरह से गंभीर है। तमाम केंद्रीय एजेंसियों के साथ-साथ राज्य और केंद्र सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है। खास तौर से पीएमओ जोशीमठ के हालात की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है।
चारधाम यात्रा के मद्देनजर यूएसडीएमए की ओर से आयोजित एक बैठक में भाग लेने देहरादून पहुंचे हसनैन ने सचिवालय में मीडिया कर्मियों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि जोशीमठ उनकी कर्मभूमि रही है। उन्होंने काफी समय तक सेना में रहकर वहां काम किया है। इसलिए उन्हें जोशीमठ से बेहद लगाव है। उन्होंने कहा कि जोशीमठ को सदृढ़ करने के लिए काम किया जा रहा है, फिलहाल वह इस बारे में बहुत कुछ नहीं कह सकते हैं। यह बेहद संवेदनशील मामला है।
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उन्होंने बताया कि आज देश में आपदा प्रबंधन के मायने बदल गए हैं। आज आपदा प्रबंधन रिस्पांस बेस्ड नहीं बल्कि, मिटीगेशन और तैयारियों पर आधारित हो गई है। देश में आपदा प्रबंधन को लेकर पिछले कुछ सालों में पूरे तंत्र की धारणा बदली है। कुछ सालों पहले तक हम लोग घटना होने के बाद उस पर रिस्पांस के बारे में सोचते थे। आज हम अपनी तैयारी को लेकर इतने एडवांस हो चुके हैं कि आने वाले जोखिम की परिस्थितियों को समझते हुए पहले ही खुद को तैयार करने की परिस्थिति में हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला राज्य है। ऐसे में यहां कई तरह की चुनौतियां हैं। चारधाम को लेकर पहली बार इस तरह की तैयारियां की जा रही हैं। इससे पहले केवल अमरनाथ यात्रा के लिए इस तरह की तैयारियां की जाती थीं।