भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि एक साल से चल रहा आंदोलन चंद घंटों में नहीं सिमटेगा, एमएसपी समेत किसानों के और भी मुद्दे हैं, सरकार को इन पर भी बात कर लिखित आश्वासन देना होगा। किसान मोर्चा ने सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखा है।
टिकैत बृहस्पतिवार को महुआडाबरा के नेहरू इंटर कालेज में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। कहा कि कृषि कानूनों की वापसी के लिए वह प्रधानमंत्री की घोषणा का सम्मान और स्वागत करते हैं, लेकिन किसानों के अन्य मुद्दों का भी समाधान होना चाहिए।
उन्हें पीएम से उम्मीद थी कि आंदोलन के दौरान शहीद हुए 700 किसानों के बारे में भी वह कुछ बोलेंगे, लेकिन मुआवजे और किसानों को न्याय के मुद्दे पर पीएम की चुप्पी ने किसानों को निराश किया है। कहा कि किसान राजनीति नहीं करता है, लेकिन भाजपा के प्रति किसानों के मन में जो खाई पैदा हो गई है वह आसानी से नहीं भर पाएगी। भाजपा को किसानों के साथ किए गए बर्ताव का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
उम्मीद से कम पहुंचे किसान, राजनीतिक पार्टियों के नेता भी पहुंचे
किसान सभा में किसानों की संख्या उम्मीद से कम रही। इसकी वजह कुछ भी हो, लेकिन किसान नेता किसानों के खेती में व्यस्त होने और संयुक्त मोर्चा के 26 नवंबर के आंदोलन की तैयारियों में जुटे होने को इसका कारण मान रहे हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी की तीनों विवादित कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बाद 24 नवंबर को कैबिनेट में प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया है। इसके बाद तराई में किसानों की पहली सभा थी। इसमें भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत को आमंत्रित किया गया। ऐसे में उम्मीद थी कि किसानों की भीड़ उमड़ेगी। आयोजन में भाकियू नेताओं, लेफ्ट से जुड़े संगठनों ने सक्रिय भागीदारी की। आयोजकों ने गांव-गांव भ्रमण कर किसानों से पंचायत को सफल बनाने की अपील की थी।
तमाम कोशिशों के बावजूद पंचायत में कम लोग ही पहुंच सके। इनमें जिले भर से आए भाकियू और लेफ्ट संगठनों के पदाधिकारियों के अलावा कांग्रेस, आप के नेता भी शामिल रहे। पहली बार विधायक आदेश चौहान को मंच पर जगह दी गई। बताया जा रहा है कि नरेश टिकैत दोपहर 12 बजे ही जसपुर पहुंच गए थे, लेकिन उन्हें ग्राम अमियावाला में भाकियू युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरजीत सिंह ढिल्लों के फार्म पर पंचायत में भीड़ जुटने का इंतजार करना पड़ा। करीब ढाई बजे वह पंचायत में पहुंचे और श्रद्धांजलि दी।
इधर, भाकियू युवा विंग के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र जीतू का कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 नवंबर को दिल्ली पहुंचने की कॉल की है। किसान दिल्ली जाने की तैयारी में हैं। इस कारण भी किसान जसपुर नहीं जा सके।