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उत्तराखंड: कृषि कानूनों की वापसी पर बोले नरेश टिकैत, प्रधानमंत्री किसान नेताओं को विश्वास में लेते तो अच्छा रहता

Thu, 25 Nov 2021 09:35 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, जसपुर

सार

नरेश टिकैत बृहस्पतिवार को किसान नेताओं की 41वीं पुण्यतिथि पर जसपुर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा और किसान सभा को संबोधित कर रहे थे।
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नरेश टिकैत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा से पहले संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं को भी विश्वास में ले लेते तो बहुत अच्छा रहता। संयुक्त किसान मोर्चा का मकसद देश के प्रधानमंत्री को झुकाने का नहीं है। वह चाहते हैं कि किसानों का भी सम्मान बना रहे।

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टिकैत ने किसान नेता हरस्वरूप और करन सिंह को श्रद्धांजलि दी। 25 नवंबर 1980 को नादेही चीनी मिल में किसान आंदोलन में महुआडाबरा नहर की पुलिया के पास ट्राली पलटने से तालमपुर गांव निवासी सरपंच हरस्वरूप सिंह और नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन करन सिंह शहीद हो गए थे। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष टिकैत ने शहीद पार्क नगर पंचायत महुआडाबरा में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। इससे पहले राजकीय इंटर कॉलेज महुआडाबरा में आयोजित किसानसभा में टिकैत ने कहा कि यह किसानों का आंदोलन है।

राजनीतिक आंदोलन नहीं है, जहां जिस किसान की मर्जी हो किसान उस पार्टी को वोट दें। इस दौरान टिकैत और क्षेत्र के किसानों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित 14 सूत्री मांगों का ज्ञापन प्रभारी तहसीलदार को सौंपा। वहां विधायक आदेश चौहान, डॉ. यूनुस चौधरी, प्रेम सहोता, गजेंद्र चौहान, सुरजीत ढिल्लो, सुखबीर सिंह भुल्लर, जागीर सिंह, दीदार सिंह, देवेंद्र चौहान, बलविंदर सिंह, तरुण गहलोत, सुंदर पाल सिंह, अमनप्रीत सिंह, बलजिंदर सिंह, इंद्रपाल सिंह, मुख्तार सिंह, चौधरी किशन सिंह आदि थे।

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चंद घंटों में नहीं सिमट सकता साल भर से चल रहा आंदोलन

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि एक साल से चल रहा आंदोलन चंद घंटों में नहीं सिमटेगा, एमएसपी समेत किसानों के और भी मुद्दे हैं, सरकार को इन पर भी बात कर लिखित आश्वासन देना होगा। किसान मोर्चा ने सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखा है।

टिकैत बृहस्पतिवार को महुआडाबरा के नेहरू इंटर कालेज में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। कहा कि कृषि कानूनों की वापसी के लिए वह प्रधानमंत्री की घोषणा का सम्मान और स्वागत करते हैं, लेकिन किसानों के अन्य मुद्दों का भी समाधान होना चाहिए।

उन्हें पीएम से उम्मीद थी कि आंदोलन के दौरान शहीद हुए 700 किसानों के बारे में भी वह कुछ बोलेंगे, लेकिन मुआवजे और किसानों को न्याय के मुद्दे पर पीएम की चुप्पी ने किसानों को निराश किया है। कहा कि किसान राजनीति नहीं करता है, लेकिन भाजपा के प्रति किसानों के मन में जो खाई पैदा हो गई है वह आसानी से नहीं भर पाएगी। भाजपा को किसानों के साथ किए गए बर्ताव का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। 

उम्मीद से कम पहुंचे किसान, राजनीतिक पार्टियों के नेता भी पहुंचे
किसान सभा में किसानों की संख्या उम्मीद से कम रही। इसकी वजह कुछ भी हो, लेकिन किसान नेता किसानों के खेती में व्यस्त होने और संयुक्त मोर्चा के 26 नवंबर के आंदोलन की तैयारियों में जुटे होने को इसका कारण मान रहे हैं। 

पीएम नरेंद्र मोदी की तीनों विवादित कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बाद 24 नवंबर को कैबिनेट में प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया है। इसके बाद तराई में किसानों की पहली सभा थी। इसमें भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत को आमंत्रित किया गया। ऐसे में उम्मीद थी कि किसानों की भीड़ उमड़ेगी। आयोजन में भाकियू नेताओं, लेफ्ट से जुड़े संगठनों ने सक्रिय भागीदारी की। आयोजकों ने गांव-गांव भ्रमण कर किसानों से पंचायत को सफल बनाने की अपील की थी।

तमाम कोशिशों के बावजूद पंचायत में कम लोग ही पहुंच सके। इनमें जिले भर से आए भाकियू और लेफ्ट संगठनों के पदाधिकारियों के अलावा कांग्रेस, आप के नेता भी शामिल रहे। पहली बार विधायक आदेश चौहान को मंच पर जगह दी गई। बताया जा रहा है कि नरेश टिकैत दोपहर 12 बजे ही जसपुर पहुंच गए थे, लेकिन उन्हें ग्राम अमियावाला में भाकियू युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरजीत सिंह ढिल्लों के फार्म पर पंचायत में भीड़ जुटने का इंतजार करना पड़ा। करीब ढाई बजे वह पंचायत में पहुंचे और श्रद्धांजलि दी।

इधर, भाकियू युवा विंग के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र जीतू का कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 नवंबर को दिल्ली पहुंचने की कॉल की है। किसान दिल्ली जाने की तैयारी में हैं। इस कारण भी किसान जसपुर नहीं जा सके। 
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