समाजवादी पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में उस समय हंगामा हो गया जब प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश सचिव आमने-सामने आ गए। दोनों के बीच जमकर तू-तू, मैं-मैं हो गई। हालांकि बाद में संगठन के कुछ पदाधिकारियों ने बीचबचाव कर मामला शांत कराया।
शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय में कार्यसमिति की बैठक शुरू हुई। बैठक में अध्यक्ष अपनी बात रख ही रहे थे कि बीच में प्रदेश सचिव मशकूर कुरैशी बोलने लगे। उन्होंने कहा कि नगर निगम हरिद्वार की ओर से पार्टी के ललिता राव पुल स्थित शहर कार्यालय और ज्वालापुर स्थित जिला कार्यालय को खाली करने का नोटिस जारी किया गया है।
वह बार-बार अध्यक्ष के संज्ञान में नोटिस की बात ला रहे हैं, लेकिन वह सुनने को तैयार नहीं हैं। अध्यक्ष डॉ. सत्यनारायण सचान ने कुछ बोलना चाहा तो दोनों के बीच बहस होने लगी। कुरैशी का कहना था कि अध्यक्ष भेदभाव कर रहे हैं जबकि अध्यक्ष का कहना था कि संगठन अपने स्तर से एकजुट होकर हर लड़ाई लड़ने को तैयार है।
प्रदेश सचिव सहित 12 सदस्यों ने किया बहिष्कार
पार्टी के प्रदेश सचिव एवं पूर्व जिलाध्यक्ष गुलफान अली भी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. एसएन सचान से खफा नजर आए। वह बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को शिकायती पत्र भेजा है, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सचान पर मनमानी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 39 सदस्यीय कमेटी में से 12 पदाधिकारी प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में शामिल नहीं हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश अध्यक्ष ने विधिवत बैठक की सूचना नहीं दी है। पदाधिकारियों का अपमान किया जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष की नीतियों के कारण पार्टी रसातल में जा रही है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग की। बहिष्कार करने वालों में सचिव गुलफाम अली के अलावा अतुल यादव, रमेश चंद्र गौड़, शाहरुख पठान उर्फ टोनी पठान, चंद मोहन मुंडी, मशकूर अहमद कुरैशी, प्रदेश कार्यालय प्रभारी रिटायर्ड डीएसपी जीसी यादव, श्रमसभा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नासिर मंत्री, केके गौतम, पूर्व प्रदेश प्रवक्ता मोहन कांडपाल, हरिद्वार के पूर्व जिला अध्यक्ष दीनानाथ यादव, नीरज यादव, नैनीताल के पूर्व जिला अध्यक्ष उमेश शर्मा, शशी कुमार यादव, मास्टर बिरम सिह यादव के नाम शामिल हैं।