बेसिक शिक्षा के निदेशक के पद को लेकर शिक्षा महानिदेशालय में अपर निदेशक के पद पर कार्यरत वंदना गर्ब्याल की वरिष्ठ की अनदेखी का मामला महिला एवं अनुसूचित जनजाति आयोग पहुंच गया है। हरिद्वार निवासी लेखराज सिंह ने आयोग में की शिकायत में कहा कि वरिष्ठ अधिकारी के बजाए उनसे जूनियर को निदेशक बनाकर समानता एवं वरिष्ठता के अधिकार का हनन किया गया है।
वंदना गर्ब्याल से जूनियर हैं रामकृष्ण उनियाल
शिक्षा विभाग में हाल ही में सीमा जौनसारी को माध्यमिक शिक्षा का निदेशक और रामकृष्ण उनियाल को बेसिक का निदेशक बनाया गया था, जबकि रामकृष्ण उनियाल वरिष्ठता में शिक्षा महानिदेशालय में अपर निदेशक के पद पर कार्यरत वंदना गर्ब्याल से जूनियर हैं।
हरिद्वार जनपद निवासी लेखराज सिंह ने इस मामले को एक महिला अधिकारी के साथ अन्याय बताते हुए मामले की अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति आयोग नई दिल्ली, राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला आयोग नई दिल्ली एवं केंद्रीय मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय नई दिल्ली से शिकायत की है। शिकायत में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग में कार्यरत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी वन्दना गर्ब्याल की वरिष्ठता को दरकिनार कर उनसे जूनियर अधिकारी को नियम विरुद्ध निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा बनाया गया है।
विभाग ने ऐसा कर निर्बल वर्ग अनुसूचित जनजाति की योग्य महिला अधिकारी के समानता एवं वरिष्ठता के अधिकारों का हनन किया है। नियमानुसार विभाग में आरके कुंवर को निदेशक सीमैट एवं सीमा जौनसारी को निदेशक माध्यमिक शिक्षा बनाए जाने के बाद वंदना गर्ब्याल को निदेशक बेसिक शिक्षा बनाया जाना चाहिए था, लेकिन विभाग ने ऐसा नहीं किया। विभाग में तत्कालीन संयुक्त निदेशक को बेसिक शिक्षा का निदेशक बना दिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार एक ओर जहां बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को लेकर अभियान चला रही है। वहीं एक महिला अधिकारी को उसके अधिकार से वंचित किया गया है।