वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी
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जम्मू कश्मीर के उधमपुर, पंजाब के गुरदासपुर, पठानकोट और हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जैसे जिलों में स्थित शिवालिक की पहाड़ियों में एक करोड़ साल पहले स्तनधारी जीवों की कई प्रजातियां पाई जाती थीं। इसका खुलासा वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के जीवाश्म विज्ञानियों द्वारा किए जा रहे शोध में हुआ है।
संस्थान के जीवाश्म विज्ञानियों की टीमों ने शिवालिक की पहाड़ियों से जीवाश्मों के कई नमूने लिए हैं, जिनका प्रयोगशाला में अध्ययन किया जा रहा है। वरिष्ठ जीवाश्म विज्ञानी डॉ. आरके सहगल के मुताबिक जीवाश्मों के अध्ययन से पता चलता है कि शिवालिक की पहाड़ियों में 50 लाख से लेकर एक करोड़ साल पहले स्तनधारी जीवों की कई प्रजातियां पाई जाती थीं।
फिलहाल, जीवाश्म विज्ञानियों द्वारा जीवाश्मों का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। ताकि, इस बात का पता लगाया जा सके कि शिवालिक की पहाड़ियों में स्तनधारी जीवों की कौन-कौन सी प्रजातियां पायी जाती थीं।
इसके अलावा संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा स्तनधारी जीवों के जीवाश्म के नमूनों के साथ ही पेड़ पौधों की कई प्रजातियों के नमूने भी लिए गए हैं, जिनका विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है।
पिछले साल मिला था स्टेगोगान प्रजाति के हाथी का 50 लाख साल पुराना जबड़ा
पिछले साल उत्तर प्रदेश वन विभाग की टीम ने सहारनपुर के शिवालिक वन प्रभाग में हाथी के जबड़े का जीवाश्म पाया था। जीवाश्म वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध में यह बात सामने आई थी कि जिस हाथी के जबड़े का जीवाश्म है वह स्टेगोगान प्रजाति का हाथी था, जो 50 लाख साल पहले शिवालिक की पहाड़ियों में पाया जाता था। यह हाथी डायनासोर के साथ धरती पर विचरण करता था।