बोर्ड के पिछले तीन साल के कार्यकाल में हरक सिंह अपने इस रुतबे के चलते कई आरोपों को दरकिनार करते रहे। बोर्ड सचिव पर भी आरोप लगे और घटिया साइकिलों को बांटने सहित अन्य कई आरोप भी उन्होंने झेले।
ऐसे में जितने मुुखर होकर वह बोर्ड के अध्यक्ष बनाते समय हुए थे, तीन साल बाद उतनी ही खामोशी से उनकी पद से विदाई भी हुई। सूत्रों के मुताबिक हरक सिंह को यह भनक भी नहीं लगी कि बोर्ड का पुनर्गठन किया जा रहा है। वह मान रहे थे कि उन्हें एक साल का सेवा विस्तार दिया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि इसी बात को लेकर हरक सिंह नाराज हैं। हालांकि सियासी समझदारी के चलते अभी तक हरक ने इस पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। सूत्रों के मुताबिक गुरुवार को हरक सिंह देहरादून में ही होंगे। ऐसे में गुरुवार को इस मामले का एक और रुख खुलकर सामने आ सकता है।