स्थायी राजधानी के लिए गैरसैंण में पूरी एक टाउनशिप विकसित करनी होगी। लेकिन इससे पहले कनेक्टिविटी जरूरी है। माना जा रहा है कि अगले 10 साल में गैरसैंण का क्षेत्र ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल कनेक्टिविटी से जुड़ जाएगा। योजना बागेश्वर-गैरसैंण और कर्णप्रयाग को रेल नेटवर्क से जोड़ने की भी है।
भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत कर्णप्रयाग-धारचूला मार्ग डबललेन होना है। जाहिरतौर पर इस योजना से गैरसैंण भी डबललेन से जुड़ जाएगा। चारधाम आलवेदर रोड परियोजना का निर्माण हो रहा है। गौचर के लिए हवाई सेवाएं शुरू हो चुकी है। गैरसैंण (भराड़ीसैंण) एक बड़ा हेलीपैड बनाया जाना है। जहां एक साथ चार से पांच हेलीकॉप्टर उतारे जा सकें।
इको फ्रेंडली राजधानी बनने का दम
गैरसैंण (भराड़ीसैंण) वनाच्छादित क्षेत्र है। ग्रीष्मकालीन राजधानी का अधिकांश भूभाग वन क्षेत्र है। ऐसे में पर्यावरण से संतुलन बनाते हुए राजधानी को विकसित करना होगा। सरकार गैरसैंण को एक ऐसे शहर के तौर पर विकसित कर सकती है जो इको फ्रेंडली हो।
2022 के विस चुनाव की धुरी बनेगा गैरसैंण
गैरसैंण(भराड़ीसैंण) को राजधानी की तरह विकसित करने के लिए अगले 10 साल में 25 हजार करोड़ खर्च करने का एलान करके मुख्यमंत्री ने सियासी हलकों में एक नई बहस का मुद्दा दे दिया है। सियासी जानकारों की मानें तो गैरसैंण 2022 के विधानसभा चुनाव की धुरी बनने जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत गरमाएगी। कांग्रेस के नेता पहले ही गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का एलान कर चुके हैं। उनकी इस घोषणा से पहले त्रिवेंद्र के एलान ने सियासी हलकों में हलचल तो पैदा कर ही दी है।