इस नियमावली के तहत 2014 में तत्कालीन सरकार ने प्रोत्साहन राशि को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार किया था। राज्य गठन के बाद से ही यूपी की यह नियमावली उत्तराखंड में भी लागू है।
जानकारों के मुताबिक, नियमावली को निरस्त करने के लिए राज्य सरकार को इससे संबंधित अधिनियम में संशोधन करना होगा, यानी सरकार को इसका प्रस्ताव मंत्रिमंडल की बैठक में भी लाना पड़ सकता है। उधर समाज कल्याण विभाग की नजर उत्तर प्रदेश में लव जिहाद रोकने को लाए गए अध्यादेश पर भी लगी है।
अंतरधार्मिक विवाह प्रोत्साहन योजना से जुड़े प्रकरण में मैंने सचिव समाज कल्याण से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
- ओम प्रकाश, मुख्य सचिव
हमारी सरकार यूपी से पहले ही उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम बना चुकी है। इस अधिनियम के आने के बाद अंतरधार्मिक विवाह प्रोत्साहन योजना का कोई वजूद नहीं होना चाहिए। इसे सरकार निरस्त करेगी। जरूरत होगी तो कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा।
- मदन कौशिक, शासकीय प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री