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उत्तराखंड: आईएमए अध्यक्ष बोले- लड़ाई अहंकारी व्यापारी से है योग-आयुर्वेद से नहीं, रामदेव पर कार्रवाई न हुई तो होगा आंदोलन

Sun, 30 May 2021 11:06 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काशीपुर

सार

एलोपैथी को लेकर दिए गए बयान के बाद बाबा रामदेव पर अब आईएमए के अध्यक्ष ने भी पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कोविड वैक्सीन लगाने से बाबा का इंकार राष्ट्रद्रोह जैसा है। इसके लिए भी उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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उत्तराखंड आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डा. अरविंद शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के प्रदेश अध्यक्ष डा. अरविंद शर्मा ने कहा है कि उनकी लड़ाई योग और आयुर्वेद से नहीं अपितु एक अहंकारी व्यापारी से है, जो अपनी दवा बेचने की लालसा में इस विवाद को राष्ट्रवाद का रूप देकर लड़ाई को आयुर्वेद बनाम एलोपैथी बनाने के प्रयास में है। कहा कि बाबा रामदेव के खिलाफ कार्रवाई न हुई तो आईएमए आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

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डा. शर्मा रविवार को यहां पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। कहा कि एलोपैथी विज्ञान आधारित है। इसमें तमाम बीमारियों को जड़ से खत्म करने और कुछ को रोकने के वैज्ञानिक प्रमाण हैं,  जबकि विश्व में कोई दूसरी पद्धति इतनी प्रमाणिक नहीं है। उन्होंने रामदेव से जानना चाहा है कि आयुर्वेद पद्धति से उन्होंने कोविड संक्रमण कितने रोगियों का इलाज किया है और रोगियों को किन-किन आयुर्वेदिक संस्थानों में भर्ती कराया।
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डा. शर्मा ने कहा कि कोविड की रोकथाम व समाज सेवा के क्षेत्र में भी बाबा रामदेव का लेस मात्र भी योगदान नहीं है। कहा कि आईएमए की लड़ाई उस बाबा रामदेव से कतई नहीं है जिसने योग विद्या को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया, बल्कि विशुद्ध रूप से मुनाफाखोर व्यापारी से है।

डा. शर्मा  ने कहा कि एलोपैथी में पौधों में दवाइयों का सॉल्ट खोजा जाता है। रामदेव और उनके अनुयायी बताएं कि उन्होंने कौन से पेड़-पौधे से क्या सॉल्ट खोजा। वह पूरे पौधे को ही दवा के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

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बहस के लिए आईएमए ने गठित किया डॉक्टरों का पैनल 

डा. शर्मा ने कहा कि अल्प शिक्षित होने के कारण उन्हें न तो आयुर्वेद का कोई ज्ञान है और न ही एलोपैथ का। यदि रामदेव के पास कोरोना के सफल इलाज की कोई दवा है तो उसे सामने लाना चाहिए। वहां आईएमए के शाखा अध्यक्ष डा. एसके अग्रवाल भी थे। 

डा. अरविंद शर्मा ने बताया कि आईएमए ने बाबा रामदेव की खुली बहस की चुनौती को स्वीकार कर उनकी ओर से उठाए गए सवालों पर बहस के लिए  डॉक्टरों का एक पैनल गठित कर दिया है।

इसमें डा. बीएस जज, डा. अमित सिंह व डा. महेश कुमार देहरादून, डा. आरके सिंघल हरिद्वार, डा. सीएस जोशी खटीमा व डा. योगराज रुड़की को शामिल किया गया है। साथ ही रामदेव से कहा है कि वह पतंजलि योगपीठ के पंजीकृत आयुर्वेदाचार्यों की टीम गठित कर बहस का समय निर्धारित करें। टीम में वह खुद और उनके सहयोगी बालकृष्ण भी रह सकते हैं। ताकि गतिरोध दूर हो और भ्रम की स्थिति खत्म कर एलोपैथी और आयुर्वेद को लेकर सौहार्द का माहौल बन सके। 
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