शासनादेश में नगर निगम को टैक्स मामले में अपार शक्तियां प्रदान की गईं हैं। निकायों में रहने वाला कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति छुपाता है या उसका गलत आकलन पेश करता है तो निकाय का अधिकारी उस संपत्ति का सर्वे कर सकता है। अगर संपत्ति का मालिक अधिकारियों को रोकेगा तो निगम उस पर 353 आईपीसी की धारा में कार्रवाई भी कर सकता है।
निकाय क्षेत्र में संपत्ति खरीदने पर निगम को देनी होगी 90 दिन में सूचना
कोई व्यक्ति अगर निकाय क्षेत्र में नई संपत्ति खरीदता है तो निगम, पालिका और पंचायत के अधिकारियों को उसे 90 दिन के भीतर सूचना देनी होगी। ऐसा नहीं करने पर निगम संपत्ति मालिक पर कड़ी कार्रवाई कर सकता है।
25 प्रतिशत एरिया वृद्धि करने पर 60 दिन में निकाय को देनी होगी सूचना
निकाय क्षेत्र में रहने वाला व्यक्ति अपने भवन के क्षेत्रफल में अगर 25 प्रतिशत की वृद्धि करेगा तो उसे 60 दिन के भीतर निकाय के अधिकारियों को सूचना देनी होगी।
ऐसे समझिए : मान लीजिए निकाय क्षेत्र में आपका कवर्ड एरिया 1000 वर्ग फीट है। आपने 250 वर्ग फीट और कवर्ड कर दिया या भवन को एक तल और बढ़ा दिया तो निकाय को इसकी सूचना देनी होगी।
खाली प्लॉट पर भी लगेगा कर
निकाय क्षेत्र में अगर किसी व्यक्ति का खाली प्लाट है तो उसे भी सर्किल रेट के हिसाब से कर देना होगा। अभी खाली प्लॉटों पर कर नहीं लगता है। इस शासनादेश के लागू होने के बाद कर लग जाएगा।
एकमुश्त टैक्स जमा करने पर पांच प्रतिशत मिलेगी छूट
भवन और स्वच्छता कर एक मुश्त पूरे साल का जमा करने पर पांच प्रतिशत की छूट मिलेगी। शासनादेश में कहा गया है कि एक अप्रैल से 30 जून तक एकमुश्त कर जमा करने पर पूरे टैक्स पर पांच प्रतिशत छूट दी जाएगी। इस साल यह छूट 31 दिसंबर तक लागू होगी।