देश के दो सर्वश्रेष्ठ वन्यजीव अभयारण्य में शुमार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पांच दिनों तक जलता रहा और आधे से अधिक जंगल आग की चपेट में आ गया था। शुक्रवार शाम बड़ी मुश्किल से आग पर काबू पा लिया गया। हालांकि अभी भी ेकुछ जगहों पर आग भड़क रही है।
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में आने वाले बांधवगढ़ के अधिकारियों के अनुसार, 29 मार्च को जब देश होली खेल रहा था, तो कुछ लोगों ने जंगलों में आग लगा दी। 700 वर्ग किलोमीटर के रिजर्व वन में से 400 वर्ग किलोमीटर आग की चपेट में आ गया। टाइगर रिजर्व की नौ रेंज में आग लगी थी। अधिकारियों का दावा है, वन्य प्राणियों को नुकसान नहीं हुआ, पर यह सुनियोजित साजिश थी। स्वत: लगने वाली आग आमतौर पर मई या जून की गर्मियों में लगती है। और वह भी एक या दो जगह ही। लेकिन पूरे वन्यजीव अभ्यारण्य में आग लगना दुर्घटना नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश है। पिछले वर्ष गणना में बांधवगढ़ में 104 बाघ पाए गए थे।
होटल मालिकाें व ग्रामीणों पर शक
वन्य अधिकारियों के अनुसार, शक की सुई दो तरह के लोगों की ओर है। एक वे जिन्होंने वर्षों पहले अभ्यारण्य की जमीन पर होटल या लॉज बना लिए लेकिन बिजली कनेक्शन न हाेने से पर्यटक नहीं मिल रहे। दूसरे वे ग्रामीण हैं जिनके आसपास के खेेतों को छत्तीसगढ़ से आए हाथियों ने नुकसान पहुंचाया था।
जांच के आदेश...केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने जांच के आदेश दिए हैं। मंत्रालय का मानना है कि यह देश के सर्वश्रेष्ठ अभयारण्य को जानबूझकर नष्ट करने का षड्यंत्र है।