वर्ष 2018 में पुलिस मुख्यालय ने इंस्पेक्टरों की सम्मिलित वरिष्ठता सूची जारी की थी। जानकारों के अनुसार 20 जनवरी 2018 को तैयार की गई इस सूची में सिविल पुलिस के दरोगाओं की वरिष्ठता को निर्धारित ही नहीं किया गया। यही नहीं सिविल पुलिस के लोगों का नाम इस सूची में शामिल भी नहीं किया गया।
कानून व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं पदोन्नत डीएसपी
ज्येष्ठता सूची निर्धारित करने में हो रही देरी से इंस्पेक्टरों में रोष व्याप्त है। यदि ऐसे ही चलता रहा तो डर यह भी सता रहा है कि सभी इंस्पेक्टर 15 से 20 सालों में रिटायर हो जाएंगे और कोई भी डीएसपी नहीं बन पाएगा। यानी उनकी यह ख्वाहिश मन में ही रह जाएगी।
जबकि सिविल पुलिस के इंस्पेक्टरों से डीएसपी बनने वाले अधिकारी कानून व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। कारण है कि उनके पास फील्ड का काफी अनुभव रहता है, जिसका पुलिस को भरपूर लाभ मिलता है। जबकि अन्य संवर्गों से आने वाले डीएसपी के बारे में ऐसा नहीं माना जाता।
सब सही मान रहे कर कोई नहीं रहा
सूत्रों के अनुसार सिविल पुलिस के ये इंस्पेक्टर जिन अधिकारियों से मिले हैं उन्होंने मांग को जायज ठहराया है। यानी जो पहले हुआ उसे गलत बताया गया है लेकिन उनकी बात मानकर इसे जारी कोई नहीं कर रहा है। यहां तक की शासन के अधिकारी भी इस मामले को जायज बता चुके हैं।
कुछ इंस्पेक्टरों ने मुलाकात की थी। उन्होंने अपनी सारी बात रखी। जो वो कह रहे हैं। उस बात पर गौर किया जा रहा है। जल्द ही इस मामले में बात की जाएगी। - अशोक कुमार, डीजी, कानून व्यवस्था