भगवती बाल सुंदरी के मंदिर में मंगलवार को ध्वज स्थापना से काशीपुर का ऐतिहासिक चैती मेला शुरू किया गया। शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत, पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा, एसडीएम गौरव कुमार और पंडा परिवार ने मेले का शुभारंभ किया। मेला क्षेत्र में दुकानें न लगने से पहले दिन मेला पूरी तरह नहीं सज सका, जिससे पब्लिक मेले में नहीं पहुंची।
मंगलवार सुबह दस बजे पंडित दयाशंकर जोशी, प्रधान पंडा वंश गोपाल, मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री, सहायक प्रधान पंडा मनोज अग्निहोत्री, पंडा कृष्ण गोपाल, संदीप, शक्ति, जतिन, शिवा, विवेक व राम अग्निहोत्री ने मंत्रोचार के साथ घट पूजन किया। इसके बाद शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत, विधायक हरभजन सिंह चीमा, मेयर ऊषा चौधरी आदि ने हवन पूजन कर मंदिर की परिक्रमा की। इसके बाद मंदिर में ध्वज स्थापना की गई।
बंशीधर भगत ने कहा कि नवरात्र के पहले दिन उन्हें मेले का शुभारंभ करने का सौभाग्य मिला है। चैती मेला लोगों की आस्था का केंद्र है। लोग यहां पहुंचकर कोविड नियमों का पालन करें, ताकि कोरोना महामारी को हराने में सभी का सहयोग मिल सके। कुंभ मेले में बिना पंजीकरण के भी लोगों के पहुंचने के सवाल पर भगत का कहना था कि लोग आस्था के चलते वहां पहुंचे हैं लेकिन लोगों को कोरोना के नियमों का भी पालन करना चाहिए। इस मौके पर भाजपा नेता राम मेहरोत्रा, प्रदेश मंत्री आशीष गुप्ता, नगर अध्यक्ष मोहन बिष्ट, अनिल कुमार, गुरविंदर सिंह चंडोक, सीमा चौहान, एएसपी प्रमोद कुमार, एसओ बीडी जोशी आदि मौजूद रहे।
मंत्री को लोगों ने बताई समस्याएं
शुभारंभ अवसर पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने भगत का स्वागत किया। इस दौरान लोगों ने मंत्री को समस्याएं भी बताईं। पंडा कृष्ण गोपाल ने द्रोणसागर रोड बनाने की मांग की। कहा कि इस रास्ते से देवी का डोला आता है। मंत्री ने विधायक से सड़क का प्रस्ताव भेजने को कहा। कार्यकर्ताओं का कहना था कि तीन साल पहले तत्कालीन डीएम ने मेले की व्यवस्था प्रशासन को सौंप दी थी। क्षेत्र के लोग सरकारी व्यवस्था से खुश नहीं है। मेला व्यवस्था वापस पंडा परिवार को सौंपी जानी चाहिए। मंत्री ने डीएम को फोन पर कहा कि इस संबंध में जनता से रायसुमारी कर निर्णय लिया जाए।
पुरातत्व विभाग ने लगाई अस्थाई शौचालयों के मरम्मत पर रोक
चैती मेला परिक्षेत्र में मंदिर समिति के करीब 40 शौचालय हैं। 25 शौचालय मंदिर समिति की ओर से बनाए गए हैं, जो पुरातत्व विभाग के क्षेत्र में आते हैं। मेले के लिए इन शौचालयों की मरम्मत मंदिर समिति द्वारा की जा रही थी लेकिन पुरातत्व विभाग ने मरम्मत कार्य पर रोक लगा दी है। इधर, मेला क्षेत्र में करीब 60 स्थायी शौचालय भी तैयार किए जाने हैं लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। पेयजल के लिए भी मात्र एक प्याऊ की व्यवस्था है। दुकानों का निर्माण कार्य भी अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। प्रसाद की कुछ दुकानें लगी हैं।