उत्तराखंड में औषधीय खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार हर जिले में एक हर्बल गार्डन बनाएगी। जडी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान (एचआरडीआई) के माध्यम से हर्बल गार्डन विकसित किए जाएंगे। इसके लिए एचआरडीआई को उद्यान विभाग के उद्यान दिए जाएंगे।
प्रदेश की भौगोलिक जलवायु हर्बल खेती के लिए बहुत ही अनुकूल है। लेकिन अभी तक जड़ी बूटी की व्यावसायिक खेती काफी कम है। प्रदेश में 22 हजार से अधिक किसान हर्बल (औषधीय) और एरोमा (सगंध) उत्पादों की खेती कर रहे हैं। अब सरकार ने हर्बल खेेती को बढ़ाने देेने पर फोकस किया।
उद्यान विभाग के जर्जर हो चुके उद्यानों को हर्बल गार्डन विकसित करने के लिए जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान को दिए जाएंगे। प्रत्येक जिले में एक हर्बल गार्डन बनेगा। जिसमें की भौगोलिक जलवायु के अनुकूल औषधीय प्रजातियों की पौध तैयार कर किसानों को दी जाएगी।
साथ ही हर्बल गार्डन में किसानों को औषधीय पौधों की खेती का प्रशिक्षण व जानकारी भी दी जाएगी। किसानों को कुटकी, तुलसी, कुट, अतीश, तेजपाल, पुष्कर मूल, काला जीरा, वन ककड़ी समेत अन्य जड़ी-बूटियों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
चमोली, पिथौरागढ़ व उत्तरकाशी जिले में खुलेंगे एचआरडीआई सेंटर
औषधीय पौधे की खेती और शोध को बढ़ावा देने के लिए सरकार एचआरडीआई के क्षेत्रीय कार्यालय चमोली, उत्तरकाशी व पिथौरागढ़ में खोलने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से जल्द ही वैज्ञानिकों के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
26 प्रजातियों की हर्बल खेती पर 50 प्रतिशत अनुदान
सरकार की ओर से प्रदेश में औषधीय पौधों की खेती के लिए 26 प्रजातियां चिन्हित हैं। इनकी खेती पर सरकार की ओर से 50 प्रतिशत सब्सिडी जा रही है। पांच नाली भूमि तक किसानों को बीज व पौध निशुल्क दिए जा रहे हैं।
प्रदेश के हर जिले में एक हर्बल गार्डन बनाने की योजना है। इसके लिए जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान को उद्यान विभाग के उद्यान दिए जाएंगे। हर्बल गार्डन में एचडीआरआई के वैैज्ञानिक नई प्रजातियों पर शोध कर किसानों को खेती करने में मार्गदर्शन करेंगे।
-सुबोध उनियाल, कृषि एवं उद्यान मंत्री