पूर्व सीएम ने कहा कि वर्ष 2021 में तत्कालिन त्रिवेंद्र सरकार ने विधानसभा में आयोग से भर्तियां कराने की नोटिंग फाइल पर लिखी थी लेकिन, नियुक्तियों के समय सरकार के आदेश को पलट दिया गया। यह भी स्पष्ट नहीं है कि नियुक्तियां पहले हो गई थीं, निर्णय बाद में पलटा गया। इसलिए इन नियुक्तियों में स्पष्ट रूप से प्रक्रिया का उल्लघंन किया गया है। सरकार के अधिकार से बाहर जाकर यह नियुक्तियां की गई हैं। सही मायने में 2021 में तदर्थ नियुक्ति का अधिकार स्पीकर को था ही नहीं।
हमने स्थानियों को दिया, इन्होंने मारा हक
पूर्व सीएम ने कहा कि हमारे समय जो तदर्थ नियुक्तियां हुई हैं, उनमें स्थानियों को मौका दिया गया, जबकि अब जो लिस्ट बाहर आ रही है, उसमें स्पष्ट है कि यहां के लोगों का हक मारा गया है। कहा जा रहा है कि तत्कालिन विस अध्यक्ष के बेटे को भी नियुक्ति दी गई, जबकि इस लिस्ट (2021) में रिश्तेदार ज्यादा हैं और गैर रिश्तेदार कम।
नियुक्ति से पूर्व वित्तीय स्वीकृति का किया था प्रावधान
पूर्व सीएम ने कहा कि वर्ष 2016 में हमारी सरकार ने नियुक्ति से पहले दो सुझाव दिए थे। पहला नियुक्तियों की जरूरत को प्रमाणित किया जाए, दूसरा इनकी पहले वित्तीय स्वीकृति ले ली जाए। तीसरा नियुक्तियां विस अध्यक्ष की जगह विस सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी करे। उस दौरान इन सभी बातों को पूरा किया गया। इस बात का भी ध्यान रखा गया कि विस में निर्धारित संख्या से अधिक नियुक्तियां नहीं की जाएं।
हाईकोर्ट के सीटिंग जज की निगरानी में सीबीआई करे जांच
हरीश रावत ने राज्य में तमाम विभागों में नियुक्ति में धांधली के सवाल पर कहा कि सभी भर्तियों की जांच हाईकोर्ट के सीटिंग जज की निगरानी में सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
सिफारिशों की बहुत लंबी लिस्ट है...
रिश्तेदारों को सिफारिश से नौकरी के सवाल पर पूर्व सीएम में कहा कि लिस्ट बहुत लंबी है, इसमें मंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल कोई नहीं छूटा है। समय आने और जरुरत पड़ने पर वह इसका खुलासा करेंगे।